अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सब कर आजु सुकृत फल बीता। भयउ कराल कालु बिपरीता।।
मूल पाठ
सब कर आजु सुकृत फल बीता। भयउ कराल कालु बिपरीता।।
बहुबिधि बिलपि चरन लपटानी। परम अभागिनि आपुहि जानी।।
स्रोत अभिलेख 2.57 · पुस्तक पृ. 391, 391
भावार्थ
मूल पाठ के बादआज सबके पुण्योंका फल पूरा हो गया! कठिन काल हमारे विपरीत हो गया। [इस प्रकार] बहुत विलाप करके और अपनेको परम अभागिनी जानकर माता श्रीरामचन्द्रजीके चरणोंमें लिपट गयीं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 391 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सब कर आजु सुकृत फल बीता। भयउ कराल कालु बिपरीता।।
English explanation
Today the fruit of everyone's good deeds has run out; time has become dreadful and adverse.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सब | सब | everyone |
| कर | का | of |
| आजु | आज | today |
| सुकृत | पुण्य; अच्छे कर्म | merit; good deeds |
| फल | फल | fruit; reward |
| बीता | समाप्त हो गया | has run out |
| भयउ | हो गया | became |
| कराल | भयानक | dreadful |
| कालु | समय | time |
| बिपरीता | प्रतिकूल | adverse |
2 बहुबिधि बिलपि चरन लपटानी। परम अभागिनि आपुहि जानी।।
English explanation
Lamenting in many ways, the mother clung to his feet and regarded herself as utterly unfortunate.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बहुबिधि | अनेक प्रकार से | in many ways |
| बिलपि | विलाप करके | having lamented |
| चरन | चरणों से | to his feet |
| लपटानी | लिपट गईं | clung |
| परम | अत्यंत | utterly |
| अभागिनि | अभाग्यवती | unfortunate woman |
| आपुहि | अपने आप को ही | herself |
| जानी | समझा | considered |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.57
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 391
- सहायक विषय
- श्रीराम-कौसल्या-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 391, 391
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।