अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
दारुन दुसह दाहु उर ब्यापा। बरनि न जाहिं बिलाप कलापा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहृदयमें भयानक दु:सह संताप छा गया। उस समयके बहुविध विलापका वर्णन नहीं किया जा सकता। श्रीरामचन्द्रजीने माताको उठाकर हृदयसे लगा लिया और फिर कोमल वचन कहकर उन्हें समझाया॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 391 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
दारुन दुसह दाहु उर ब्यापा। बरनि न जाहिं बिलाप कलापा।।
राम उठाइ मातु उर लाई। कहि मृदु बचन बहुरि समुझाई।।
स्रोत अभिलेख 2.57 · पुस्तक पृ. 391, 391
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 दारुन दुसह दाहु उर ब्यापा। बरनि न जाहिं बिलाप कलापा।।
English explanation
A dreadful, unbearable anguish filled her heart; her many lamentations cannot be described.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दारुन | भयंकर | terrible |
| दुसह | असहनीय | unbearable |
| दाहु | जलन; संताप | burning anguish |
| उर | हृदय में | in the heart |
| ब्यापा | व्याप्त हो गया | spread; filled |
| बरनि | वर्णन किए | described |
| न | नहीं | not |
| जाहिं | जा सकते | can be |
| बिलाप | विलाप | lamentations |
| कलापा | समूह; अनेक रूप | multitude; many forms |
2 राम उठाइ मातु उर लाई। कहि मृदु बचन बहुरि समुझाई।।
English explanation
Rama lifted his mother, embraced her, and again comforted her with gentle words.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | श्रीराम | Rama, her son |
| उठाइ | उठाकर | having lifted |
| मातु | माता को | his mother |
| उर | हृदय से; छाती से | to his breast |
| लाई | लगा लिया | held close |
| कहि | कहकर | having spoken |
| मृदु | कोमल | gentle |
| बचन | वचन | words |
| बहुरि | फिर | again |
| समुझाई | समझाया; सांत्वना दी | reassured; comforted |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.57
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 391
- सहायक विषय
- श्रीराम-कौसल्या-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 391, 391
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