अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
देन कहेन्हि मोहि दुइ बरदाना। मागेउँ जो कछु मोहि सोहाना।
मूल पाठ
देन कहेन्हि मोहि दुइ बरदाना। मागेउँ जो कछु मोहि सोहाना।
सो सुनि भयउ भूप उर सोचू। छाड़ि न सकहिं तुम्हार सँकोचू।।
स्रोत अभिलेख 2.4 · पुस्तक पृ. 377, 377
भावार्थ
मूल पाठ के बादइन्होंने मुझे दो वरदान देनेको कहा था। मुझे जो कुछ अच्छा लगा, वही मैंने माँगा। उसे सुनकर राजाके हृदयमें सोच हो गया; क्योंकि ये तुम्हारा संकोच नहीं छोड़ सकते॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 377 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 देन कहेन्हि मोहि दुइ बरदाना। मागेउँ जो कछु मोहि सोहाना।
English explanation
He had promised to grant me two boons. I asked for whatever pleased me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देन | देने को | to grant |
| कहेन्हि | उन्होंने कहा था, वचन दिया था | he had said or promised |
| मोहि | मुझे | to me |
| दुइ | दो | two |
| बरदाना | वरदान | boons |
| मागेउँ | मैंने माँगा | I asked for |
| जो | जो | whatever |
| कछु | कुछ | things |
| मोहि | मुझे | to me |
| सोहाना | अच्छा लगा | seemed pleasing |
2 सो सुनि भयउ भूप उर सोचू। छाड़ि न सकहिं तुम्हार सँकोचू।।
English explanation
Hearing that, anxiety arose in the king’s heart. He cannot overcome his hesitation concerning you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | वह माँग | that request |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| भयउ | उत्पन्न हुई | arose |
| भूप | राजा के | the king’s |
| उर | हृदय में | in the heart |
| सोचू | चिंता | anxiety |
| छाड़ि | छोड़ | set aside |
| न | नहीं | not |
| सकहिं | सकते हैं | can |
| तुम्हार | तुम्हारे प्रति | concerning you |
| सँकोचू | संकोच, मन की झिझक | hesitation or reluctance |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.4
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 377
- सहायक विषय
- श्रीराम-कैकेयी-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 377, 377
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