अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
देखि पाय मुनिराय तुम्हारे। भए सुकृत सब सुफल हमारे।।
मूल पाठ
देखि पाय मुनिराय तुम्हारे। भए सुकृत सब सुफल हमारे।।
अब जहँ राउर आयसु होई। मुनि उदबेगु न पावै कोई।।
स्रोत अभिलेख 2.126 · पुस्तक पृ. 448, 448
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे मुनिराज! आपके चरणोंका दर्शन करनेसे आज हमारे सब पुण्य सफल हो गये (हमें सारे पुण्योंका फल मिल गया)। अब जहाँ आपकी आज्ञा हो और जहाँ कोई भी मुनि उद्वेगको प्राप्त न हो—॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 448 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 देखि पाय मुनिराय तुम्हारे। भए सुकृत सब सुफल हमारे।।
English explanation
O great sage, seeing your feet has brought all my meritorious deeds to fruition.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | having seen |
| पाय | चरण | feet |
| मुनिराय | हे मुनिराज | O great sage |
| तुम्हारे | आपके | your |
| भए | हो गए | have become |
| सुकृत | पुण्यकर्म | meritorious deeds |
| सब | सभी | all |
| सुफल | सफल | fruitful |
| हमारे | मेरे | my |
2 अब जहँ राउर आयसु होई। मुनि उदबेगु न पावै कोई।।
English explanation
Now indicate a place where you permit me to stay and where no sage would be disturbed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अब | अब | now |
| जहँ | जहाँ | where |
| राउर | आपकी | your |
| आयसु | आज्ञा | permission |
| होई | हो | may be |
| मुनि | मुनि | sage |
| उदबेगु | उद्वेग या परेशानी | disturbance or distress |
| न | नहीं | not |
| पावै | पाए | experience |
| कोई | कोई भी | any |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.126
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 448
- सहायक विषय
- श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 448, 448
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