अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मुनि तापस जिन्ह तें दुखु लहहीं। ते नरेस बिनु पावक दहहीं।।
मूल पाठ
मुनि तापस जिन्ह तें दुखु लहहीं। ते नरेस बिनु पावक दहहीं।।
मंगल मूल बिप्र परितोषू। दहइ कोटि कुल भूसुर रोषू।।
स्रोत अभिलेख 2.126 · पुस्तक पृ. 448, 448
भावार्थ
मूल पाठ के बादक्योंकि जिनसे मुनि और तपस्वी दु:ख पाते हैं, वे राजा बिना अग्निके ही (अपने दुष्ट कर्मोंसे ही) जलकर भस्म हो जाते हैं। ब्राह्मणोंका संतोष सब मङ्गलोंकी जड़ है और भूदेव ब्राह्मणोंका क्रोध करोड़ों कुलोंको भस्म कर देता है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 448 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 मुनि तापस जिन्ह तें दुखु लहहीं। ते नरेस बिनु पावक दहहीं।।
English explanation
Kings who cause sages and ascetics to suffer burn even without fire.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनि | मुनि | sages |
| तापस | तपस्वी | ascetics |
| जिन्ह | जिन राजाओं | those kings whom |
| तें | से | from |
| दुखु | दुख | suffering |
| लहहीं | पाते हैं | receive |
| ते | वे | those |
| नरेस | राजा | kings |
| बिनु | बिना | without |
| पावक | अग्नि | fire |
| दहहीं | जलते हैं | burn |
2 मंगल मूल बिप्र परितोषू। दहइ कोटि कुल भूसुर रोषू।।
English explanation
The contentment of Brahmins is the root of well-being; their anger burns down countless lineages.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मंगल | कल्याण | well-being |
| मूल | मूल आधार | root or foundation |
| बिप्र | ब्राह्मणों की | of Brahmins |
| परितोषू | संतुष्टि | contentment |
| दहइ | जला देता है | burns down |
| कोटि | करोड़ों | tens of millions of |
| कुल | कुलों को | lineages |
| भूसुर | ब्राह्मणों का | of Brahmins |
| रोषू | क्रोध | anger |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.126
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 448
- सहायक विषय
- श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 448, 448
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