अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
देखत स्यामल धवल हलोरे। पुलकि सरीर भरत कर जोरे।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्याम और सफेद (यमुनाजी और गङ्गाजीकी) लहरोंको देखकर भरतजीका शरीर पुलकित हो उठा और उन्होंने हाथ जोड़कर कहा—हे तीर्थराज! आप समस्त कामनाओंको पूर्ण करनेवाले हैं। आपका प्रभाव वेदोंमें प्रसिद्ध और संसारमें प्रकट है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 513 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
देखत स्यामल धवल हलोरे। पुलकि सरीर भरत कर जोरे।।
सकल काम प्रद तीरथराऊ। बेद बिदित जग प्रगट प्रभाऊ।।
स्रोत अभिलेख 2.204 · पुस्तक पृ. 512, 513
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 देखत स्यामल धवल हलोरे। पुलकि सरीर भरत कर जोरे।।
English explanation
Seeing the dark and white waves, Bharata felt his body thrill and joined his hands.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखत | देखकर | on seeing |
| स्यामल | श्याम रंग की | dark-colored |
| धवल | श्वेत | white |
| हलोरे | लहरें | waves |
| पुलकि | रोमांचित हो उठा | thrilled with goosebumps |
| सरीर | शरीर | body |
| भरत | भरत, राम के भाई | Bharata, Rama’s brother |
| कर | हाथ | hands |
| जोरे | जोड़ लिए | joined together |
2 सकल काम प्रद तीरथराऊ। बेद बिदित जग प्रगट प्रभाऊ।।
English explanation
O king of sacred places, who grants every wish! Your power is known in the Vedas and manifest throughout the world.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सकल | सभी | all |
| काम | इच्छाएँ; कामनाएँ | wishes; desires |
| प्रद | प्रदान करने वाले | granting |
| तीरथराऊ | हे तीर्थों के राजा, प्रयाग | O king of sacred places, Prayaga |
| बेद | वेदों में | in the Vedas |
| बिदित | ज्ञात; प्रसिद्ध | known; celebrated |
| जग | संसार में | in the world |
| प्रगट | प्रकट | manifest |
| प्रभाऊ | प्रभाव; महिमा | power; greatness |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.204
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 513
- सहायक विषय
- भरतजीका प्रयाग जाना और भरत-भरद्वाज-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 512, 513
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।