अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मागउँ भीख त्यागि निज धरमू। आरत काह न करइ कुकरमू।।
मूल पाठ
मागउँ भीख त्यागि निज धरमू। आरत काह न करइ कुकरमू।।
अस जियँ जानि सुजान सुदानी। सफल करहिं जग जाचक बानी।।
स्रोत अभिलेख 2.204 · पुस्तक पृ. 512, 513
भावार्थ
मूल पाठ के बादमैं अपना धर्म (न माँगनेका क्षत्रियधर्म) त्यागकर आपसे भीख माँगता हूँ। आत्र्त मनुष्य कौन- सा कुकर्म नहीं करता? ऐसा हृदयमें जानकर सुजान उत्तम दानी जगत्में माँगनेवालेकी वाणीको सफल किया करते हैं (अर्थात् वह जो माँगता है, सो दे देते हैं)॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 513 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 मागउँ भीख त्यागि निज धरमू। आरत काह न करइ कुकरमू।।
English explanation
Abandoning my own duty, I ask for alms; what wrongful act will a distressed person not commit?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मागउँ | मैं माँगता हूँ | I ask |
| भीख | भीख; याचित वर | alms; a begged-for boon |
| त्यागि | त्यागकर | abandoning |
| निज | अपना | my own |
| धरमू | धर्म; कर्तव्य | duty; proper conduct |
| आरत | दुख से व्याकुल व्यक्ति | a distressed person |
| काह | कौन-सा | what |
| न | नहीं | not |
| करइ | करता है | does; commits |
| कुकरमू | अनुचित कर्म | wrongful act |
2 अस जियँ जानि सुजान सुदानी। सफल करहिं जग जाचक बानी।।
English explanation
Understanding this in their hearts, wise and generous donors in the world fulfill a supplicant’s plea.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | this; thus |
| जियँ | मन में | in the heart |
| जानि | जानकर; समझकर | knowing; understanding |
| सुजान | समझदार | wise; discerning |
| सुदानी | उदार दानी | generous donors |
| सफल | पूरी; फलवती | fulfilled; fruitful |
| करहिं | करते हैं | make; render |
| जग | संसार में | in the world |
| जाचक | याचक की | of the supplicant |
| बानी | वाणी; प्रार्थना | words; plea |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.204
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 513
- सहायक विषय
- भरतजीका प्रयाग जाना और भरत-भरद्वाज-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 512, 513
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।