अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
दुघरी साधि चले ततकाला। किए बिश्रामु न मग महीपाला।।
मूल पाठ
दुघरी साधि चले ततकाला। किए बिश्रामु न मग महीपाला।।
भोरहिं आजु नहाइ प्रयागा। चले जमुन उतरन सबु लागा।।
स्रोत अभिलेख 2.272 · पुस्तक पृ. 570, 571
भावार्थ
मूल पाठ के बादवे दुघडिय़ा मुहूर्त साधकर उसी समय चल पड़े। राजाने रास्तेमें कहीं विश्राम भी नहीं किया। आज ही सबेरे प्रयागराजमें स्नान करके चले हैं। जब सब लोग यमुनाजी उतरने लगे,॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 570 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 दुघरी साधि चले ततकाला। किए बिश्रामु न मग महीपाला।।
English explanation
Completing the preparations in two ghari, the king departed at once and took no rest on the way.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दुघरी | दो घड़ी में | in two ghari |
| साधि | तैयारी पूरी करके | having completed preparations |
| चले | चल पड़े | departed |
| ततकाला | तुरंत | at once |
| किए | किया | took |
| बिश्रामु | विश्राम | rest |
| न | नहीं | no |
| मग | मार्ग में | on the way |
| महीपाला | राजा जनक ने | King Janak |
2 भोरहिं आजु नहाइ प्रयागा। चले जमुन उतरन सबु लागा।।
English explanation
Having bathed at Prayag early this morning, they set out, and the whole party began crossing the Yamuna.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भोरहिं | भोर में ही | early at dawn |
| आजु | आज | today |
| नहाइ | स्नान करके | having bathed |
| प्रयागा | प्रयाग में | at Prayag, the sacred confluence |
| चले | चल पड़े | set out |
| जमुन | यमुना नदी | the Yamuna River |
| उतरन | पार करने | to cross |
| सबु | सारा दल | the whole party |
| लागा | लग गया | began |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.272
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 570
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरतादिका संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 570, 571
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।