अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
धरि धीरजु करि भरत बड़ाई। लिए सुभट साहनी बोलाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दफिर जनकजीने धीरज धरकर और भरतजीकी बड़ाई करके अच्छे योद्धाओं और साहनियोंको बुलाया। घर, नगर और देशमें रक्षकोंको रखकर घोड़े, हाथी, रथ आदि बहुत-सी सवारियाँ सजवायीं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 570 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
धरि धीरजु करि भरत बड़ाई। लिए सुभट साहनी बोलाई।।
घर पुर देस राखि रखवारे। हय गय रथ बहु जान सँवारे।।
स्रोत अभिलेख 2.272 · पुस्तक पृ. 570, 571
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 धरि धीरजु करि भरत बड़ाई। लिए सुभट साहनी बोलाई।।
English explanation
Janak composed himself, praised Bharat, and summoned brave soldiers and military officers.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धरि | धारण करके | having maintained |
| धीरजु | धैर्य | composure |
| करि | करके | having offered |
| भरत | भरत की | of Bharat |
| बड़ाई | प्रशंसा | praise |
| लिए | ले लिया | completed the summoning |
| सुभट | वीर सैनिक | brave soldiers |
| साहनी | सैन्य अधिकारी | military officers |
| बोलाई | बुलाकर | having summoned |
2 घर पुर देस राखि रखवारे। हय गय रथ बहु जान सँवारे।।
English explanation
After appointing guards for the palace, city, and kingdom, he had horses, elephants, chariots, and many conveyances prepared.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| घर | महल में | for the palace |
| पुर | नगर में | for the city |
| देस | राज्य में | for the kingdom |
| राखि | नियुक्त करके | having stationed |
| रखवारे | रक्षक | guards |
| हय | घोड़े | horses |
| गय | हाथी | elephants |
| रथ | रथ | chariots |
| बहु | अनेक | many |
| जान | वाहन | conveyances |
| सँवारे | तैयार कराए | had prepared |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.272
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 570
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरतादिका संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 570, 571
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।