अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
दूतन्ह आइ भरत कइ करनी। जनक समाज जथामति बरनी।।
मूल पाठ
दूतन्ह आइ भरत कइ करनी। जनक समाज जथामति बरनी।।
सुनि गुर परिजन सचिव महीपति। भे सब सोच सनेहँ बिकल अति।।
स्रोत अभिलेख 2.272 · पुस्तक पृ. 570, 571
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[गुप्त] दूतोंने आकर राजा जनकजीकी सभामें भरतजीकी करनीका अपनी बुद्धिके अनुसार वर्णन किया। उसे सुनकर गुरु, कुटुम्बी, मन्त्री और राजा सभी सोच और स्नेहसे अत्यन्त व्याकुल हो गये॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 570 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 दूतन्ह आइ भरत कइ करनी। जनक समाज जथामति बरनी।।
English explanation
The messengers arrived and described Bharat’s conduct before Janak’s assembly, to the best of their understanding.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दूतन्ह | दूतों ने | the messengers |
| आइ | आकर | having arrived |
| भरत | भरत, राम के भाई | Bharat, Rama’s brother |
| कइ | की | of |
| करनी | आचरण और कार्य | conduct and deeds |
| जनक | राजा जनक की | of King Janak |
| समाज | सभा में | in the assembly |
| जथामति | अपनी समझ के अनुसार | to the best of their understanding |
| बरनी | वर्णन किया | described |
2 सुनि गुर परिजन सचिव महीपति। भे सब सोच सनेहँ बिकल अति।।
English explanation
Hearing this, the preceptor, relatives, ministers, and king all became deeply distressed with concern and affection.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | on hearing |
| गुर | गुरु | the preceptor |
| परिजन | परिवारजन | relatives |
| सचिव | मंत्री | ministers |
| महीपति | राजा जनक | King Janak |
| भे | हो गए | became |
| सब | सभी | all |
| सोच | चिंता से | with concern |
| सनेहँ | स्नेह से | with affection |
| बिकल | व्याकुल | distressed |
| अति | अत्यंत | deeply |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.272
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 570
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरतादिका संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 570, 571
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।