अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
दीन बचन गुह कह कर जोरी। बिनय सुनहु रघुकुलमनि मोरी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दगुह हाथ जोड़कर दीन वचन बोला—हे रघुकुलशिरोमणि! मेरी विनती सुनिये। मैं नाथ (आप)के साथ रहकर, रास्ता दिखाकर, चार (कुछ)दिन चरणोंकी सेवा करके—॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 429 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
दीन बचन गुह कह कर जोरी। बिनय सुनहु रघुकुलमनि मोरी।।
नाथ साथ रहि पंथु देखाई। करि दिन चारि चरन सेवकाई।।
स्रोत अभिलेख 2.104 · पुस्तक पृ. 429, 430
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 दीन बचन गुह कह कर जोरी। बिनय सुनहु रघुकुलमनि मोरी।।
English explanation
With folded hands, Guha speaks humbly: ‘O Rama, jewel of Raghu’s lineage, hear my plea.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दीन | विनम्र; दीनतापूर्ण | humble; supplicating |
| बचन | वचन | words |
| गुह | निषादराज गुह | Guha, the Nishada chief |
| कह | कहते हैं | says |
| कर | हाथ | hands |
| जोरी | जोड़कर | having joined |
| बिनय | विनती | plea |
| सुनहु | सुनिए | please hear |
| रघुकुलमनि | हे रघुकुल के मणि राम | O Rama, jewel of Raghu’s lineage |
| मोरी | मेरी | my |
2 नाथ साथ रहि पंथु देखाई। करि दिन चारि चरन सेवकाई।।
English explanation
‘My lord, let me stay with you, show the way, and serve at your feet for four days.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाथ | हे स्वामी | O lord |
| साथ | आपके साथ | with you |
| रहि | रहकर | staying |
| पंथु | मार्ग | the path |
| देखाई | दिखाकर | showing |
| करि | करके | performing |
| दिन | दिन | days |
| चारि | चार | four |
| चरन | आपके चरणों की | at your feet |
| सेवकाई | सेवा | service |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.104
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 429
- सहायक विषय
- केवटका प्रेम और गङ्गा-पार जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 429, 430
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।