अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जेहिं बन जाइ रहब रघुराई। परनकुटी मैं करबि सुहाई।।
मूल पाठ
जेहिं बन जाइ रहब रघुराई। परनकुटी मैं करबि सुहाई।।
तब मोहि कहँ जसि देब रजाई। सोइ करिहउँ रघुबीर दोहाई।।
स्रोत अभिलेख 2.104 · पुस्तक पृ. 429, 430
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे रघुराज! जिस वनमें आप जाकर रहेंगे, वहाँ मैं सुन्दर पर्णकुटी (पत्तोंकी कुटिया) बना दूँगा। तब मुझे आप जैसी आज्ञा देंगे, मुझे रघुवीर (आप) की दुहाई है, मैं वैसा ही करूँगा॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 430 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जेहिं बन जाइ रहब रघुराई। परनकुटी मैं करबि सुहाई।।
English explanation
‘O Rama, lord of Raghu’s lineage, in whichever forest you go to dwell, I will build a lovely leaf hut.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जेहिं | जिस में | in whichever |
| बन | वन | forest |
| जाइ | जाकर | having gone |
| रहब | आप रहेंगे | you will dwell |
| रघुराई | हे रघुराज राम | O Rama, lord of Raghu’s lineage |
| परनकुटी | पत्तों की कुटिया | a hut made of leaves |
| मैं | मैं | I |
| करबि | बनाऊँगा | will build |
| सुहाई | सुंदर | lovely |
2 तब मोहि कहँ जसि देब रजाई। सोइ करिहउँ रघुबीर दोहाई।।
English explanation
‘Then I will do whatever you command me—O Rama, hero of Raghu’s lineage, I solemnly invoke you as my pledge!’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| मोहि | मुझ | me |
| कहँ | को | to |
| जसि | जैसी | whatever kind of |
| देब | आप देंगे | you will give |
| रजाई | आज्ञा | command |
| सोइ | वही | that very thing |
| करिहउँ | मैं करूँगा | I will do |
| रघुबीर | हे रघुवंश के वीर राम | O Rama, hero of Raghu’s lineage |
| दोहाई | आपकी दुहाई; शपथपूर्ण पुकार | solemn invocation of you as a pledge |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.104
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 430
- सहायक विषय
- केवटका प्रेम और गङ्गा-पार जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 429, 430
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।