अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सहज सनेह राम लखि तासु। संग लीन्ह गुह हृदय हुलासू।।
मूल पाठ
सहज सनेह राम लखि तासु। संग लीन्ह गुह हृदय हुलासू।।
पुनि गुहँ ग्याति बोलि सब लीन्हे। करि परितोषु बिदा तब कीन्हे।।
स्रोत अभिलेख 2.104 · पुस्तक पृ. 429, 430
भावार्थ
मूल पाठ के बादउसके स्वाभाविक प्रेमको देखकर श्रीरामचन्द्रजीने उसको साथ ले लिया, इससे गुहके हृदयमें बड़ा आनन्द हुआ। फिर गुह (निषादराज) ने अपनी जातिके लोगोंको बुला लिया और उनका संतोष कराके तब उनको विदा किया॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 430 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सहज सनेह राम लखि तासु। संग लीन्ह गुह हृदय हुलासू।।
English explanation
Seeing Guha’s spontaneous affection, Rama took him along, and Guha’s heart filled with joy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सहज | स्वाभाविक; निष्कपट | spontaneous; unforced |
| सनेह | प्रेम | affection |
| राम | राम ने | Rama |
| लखि | देखकर | seeing |
| तासु | उसका, गुह का | his, Guha’s |
| संग | साथ | along |
| लीन्ह | ले लिया | took |
| गुह | गुह के | Guha’s |
| हृदय | हृदय में | in the heart |
| हुलासू | उल्लास हुआ | joy arose |
2 पुनि गुहँ ग्याति बोलि सब लीन्हे। करि परितोषु बिदा तब कीन्हे।।
English explanation
Then Guha summoned all his kinsfolk and, after reassuring them, sent them away.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | then; next |
| गुहँ | गुह ने | Guha |
| ग्याति | कुटुंबियों को | kinsfolk |
| बोलि | बुलाकर | having called |
| सब | सब | all |
| लीन्हे | बुला लिया | gathered |
| करि | करके | having made |
| परितोषु | संतुष्ट; आश्वस्त | satisfied; reassured |
| बिदा | विदा | departure; dismissal |
| तब | तब | then |
| कीन्हे | किया | did; sent them off |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.104
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 430
- सहायक विषय
- केवटका प्रेम और गङ्गा-पार जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 429, 430
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।