अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
गंग बचन सुनि मंगल मूला। मुदित सीय सुरसरि अनुकुला।।
मूल पाठ
गंग बचन सुनि मंगल मूला। मुदित सीय सुरसरि अनुकुला।।
तब प्रभु गुहहि कहेउ घर जाहू। सुनत सूख मुखु भा उर दाहू।।
स्रोत अभिलेख 2.104 · पुस्तक पृ. 429, 430
भावार्थ
मूल पाठ के बादमङ्गलके मूल गङ्गाजीके वचन सुनकर और देवनदीको अनुकूल देखकर सीताजी आनन्दित हुईं। तब प्रभु श्रीरामचन्द्रजीने निषादराज गुहसे कहा कि भैया! अब तुम घर जाओ। यह सुनते ही उसका मँुह सूख गया और हृदयमें दाह उत्पन्न हो गया॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 429 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 गंग बचन सुनि मंगल मूला। मुदित सीय सुरसरि अनुकुला।।
English explanation
AI draft: Hearing Ganga’s words, a source of auspiciousness, Sita rejoiced; Ganga was favorably disposed toward her.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गंग | गंगा के | of Ganga, the river goddess |
| बचन | वचन | words |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| मंगल | मंगल का | of auspiciousness |
| मूला | मूल; स्रोत | root; source |
| मुदित | प्रसन्न हुईं | rejoiced |
| सीय | सीता | Sita, Rama’s wife |
| सुरसरि | गंगा, देवताओं की नदी | Ganga, the celestial river |
| अनुकुला | अनुकूल; कृपालु | favorably disposed; gracious |
2 तब प्रभु गुहहि कहेउ घर जाहू। सुनत सूख मुखु भा उर दाहू।।
English explanation
Then Lord Rama told Guha, ‘Go home.’ On hearing this, Guha’s mouth went dry and his heart burned with distress.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| प्रभु | प्रभु राम ने | Lord Rama |
| गुहहि | गुह से | to Guha, the Nishada chief |
| कहेउ | कहा | said |
| घर | घर | home |
| जाहू | जाओ | go |
| सुनत | सुनते ही | upon hearing |
| सूख | सूख गया | went dry |
| मुखु | मुँह | mouth |
| भा | हुआ | arose; occurred |
| उर | हृदय में | in the heart |
| दाहू | जलन; संताप | burning distress |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.104
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 429
- सहायक विषय
- केवटका प्रेम और गङ्गा-पार जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 429, 430
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।