अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
दासीं दास बोलाइ बहोरी। गुरहि सौंपि बोले कर जोरी।।
मूल पाठ
दासीं दास बोलाइ बहोरी। गुरहि सौंपि बोले कर जोरी।।
सब कै सार सँभार गोसाईं। करबि जनक जननी की नाई।।
स्रोत अभिलेख 2.8 · पुस्तक पृ. 409, 410
भावार्थ
मूल पाठ के बादफिर दास-दासियोंको बुलाकर उन्हें गुरुजीको सौंपकर, हाथ जोड़कर बोले—हे गुसाईं! इन सबकी माता-पिताके समान सार-सँभार (देख-रेख) करते रहियेगा॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 410 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 दासीं दास बोलाइ बहोरी। गुरहि सौंपि बोले कर जोरी।।
English explanation
Then Rama called the female and male servants, entrusted them to his preceptor, and spoke with folded hands.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दासीं | दासियों को | the female servants |
| दास | दासों को | the male servants |
| बोलाइ | बुलाकर | having called |
| बहोरी | फिर | then |
| गुरहि | गुरु को | to his preceptor |
| सौंपि | सौंपकर | having entrusted |
| बोले | बोले | said |
| कर | हाथ | hands |
| जोरी | जोड़कर | having joined |
2 सब कै सार सँभार गोसाईं। करबि जनक जननी की नाई।।
English explanation
Master, please care for them all as a father and mother would.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सब | सबकी | everyone |
| कै | की | of |
| सार | खबर, देखरेख | attention, care |
| सँभार | संभाल, देखभाल | looking after |
| गोसाईं | हे स्वामी | O master |
| करबि | कीजिएगा | please undertake |
| जनक | पिता | father |
| जननी | माता | mother |
| की | की | of |
| नाई | तरह | in the manner |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.8
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 410
- सहायक विषय
- श्रीराम-सीता-लक्ष्मणका वनगमन और नगर-निवासियोंको सोये छोड़कर आगे बढ़ना
- मुद्रित पृष्ठ
- 409, 410
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।