अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
थके नारि नर प्रेम पिआसे। मनहुँ मृगी मृग देखि दिआ से।।
मूल पाठ
थके नारि नर प्रेम पिआसे। मनहुँ मृगी मृग देखि दिआ से।।
सीय समीप ग्रामतिय जाहीं। पूँछत अति सनेहँ सकुचाहीं।।
स्रोत अभिलेख 2.116 · पुस्तक पृ. 439, 440
भावार्थ
मूल पाठ के बादप्रेमके प्यासे [वे गाँवोंके] स्त्री-पुरुष [इनके सौन्दर्य-माधुर्यकी छटा देखकर] ऐसे थकित रह गये जैसे दीपकको देखकर हिरनी और हिरन [निस्तब्ध रह जाते हैं]! गाँवोंकी स्त्रियाँ सीताजीके पास जाती हैं; परन्तु अत्यन्त स्नेहके कारण पूछते सकुचाती हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 440 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 थके नारि नर प्रेम पिआसे। मनहुँ मृगी मृग देखि दिआ से।।
English explanation
The women and men, thirsting for love, stood transfixed, like does and deer arrested by the sight of a lamp.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| थके | स्तब्ध रह गए | stood transfixed |
| नारि | स्त्रियाँ | women |
| नर | पुरुष | men |
| प्रेम | प्रेम के | for love |
| पिआसे | प्यासे | thirsting |
| मनहुँ | मानो | as though |
| मृगी | हिरनियाँ | does |
| मृग | हिरण | deer |
| देखि | देखकर | on seeing |
| दिआ | दीपक | a lamp |
| से | जैसे | like |
2 सीय समीप ग्रामतिय जाहीं। पूँछत अति सनेहँ सकुचाहीं।।
English explanation
The village women approach Sita; in their deep affection, they feel shy about asking her.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सीय | सीता के | Sita’s |
| समीप | पास | near |
| ग्रामतिय | गाँव की स्त्रियाँ | village women |
| जाहीं | जाती हैं | go |
| पूँछत | पूछते हुए | while asking |
| अति | अत्यंत | very deep |
| सनेहँ | स्नेह से | with affection |
| सकुचाहीं | संकोच करती हैं | feel shy |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.116
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 440
- सहायक विषय
- यमुनाको प्रणाम, वनवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 439, 440
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।