अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बरनि न जाइ मनोहर जोरी। सोभा बहुत थोरि मति मोरी।।
मूल पाठ
बरनि न जाइ मनोहर जोरी। सोभा बहुत थोरि मति मोरी।।
राम लखन सिय सुंदरताई। सब चितवहिं चित मन मति लाई।।
स्रोत अभिलेख 2.116 · पुस्तक पृ. 439, 440
भावार्थ
मूल पाठ के बादउस मनोहर जोड़ीका वर्णन नहीं किया जा सकता; क्योंकि शोभा बहुत अधिक है, और मेरी बुद्धि थोड़ी है। श्रीराम, लक्ष्मण और सीताजीकी सुन्दरताको सब लोग मन, चित्त और बुद्धि तीनोंको लगाकर देख रहे हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 439 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बरनि न जाइ मनोहर जोरी। सोभा बहुत थोरि मति मोरी।।
English explanation
This enchanting pair cannot be adequately described: their beauty is immense, while my understanding is limited.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बरनि | वर्णन करना | to describe |
| न | नहीं | not |
| जाइ | किया जा सकता | can be done |
| मनोहर | मन को मोहने वाली | enchanting |
| जोरी | जोड़ी—राम और सीता | the pair—Rama and Sita |
| सोभा | सुंदरता | beauty |
| बहुत | बहुत अधिक | immense |
| थोरि | थोड़ी | limited |
| मति | बुद्धि | understanding |
| मोरी | मेरी | my |
2 राम लखन सिय सुंदरताई। सब चितवहिं चित मन मति लाई।।
English explanation
Everyone gazes at the beauty of Rama, Lakshmana, and Sita with their attention, mind, and understanding fully engaged.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम | Rama |
| लखन | लक्ष्मण, राम के छोटे भाई | Lakshmana, Rama’s younger brother |
| सिय | सीता, राम की पत्नी | Sita, Rama’s wife |
| सुंदरताई | सुंदरता | beauty |
| सब | सभी लोग | everyone |
| चितवहिं | निहारते हैं | gaze at |
| चित | चित्त; ध्यान | attention; consciousness |
| मन | मन | mind |
| मति | बुद्धि | understanding |
| लाई | लगाकर | having focused |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.116
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 439
- सहायक विषय
- यमुनाको प्रणाम, वनवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 439, 440
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।