अयोध्याकाण्ड · दोहा 115 · दोहा/सोरठा
जटा मुकुट सीसनि सुभग उर भुज नयन बिसाल।
जटा मुकुट सीसनि सुभग उर भुज नयन बिसाल।
सरद परब बिधु बदन बर लसत स्वेद कन जाल।।115।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.115 · पुस्तक पृ. 439, 439
भावार्थ और शब्दार्थ
1जटा मुकुट सीसनि सुभग उर भुज नयन बिसाल।
दोनों के सिरों पर जटाओं के सुंदर मुकुट हैं; उनके वक्ष, भुजाएँ और नेत्र विशाल हैं।
English explanation
Beautiful crowns of matted hair adorn their heads; their chests, arms, and eyes are broad and large.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जटा | जटाओं के | of matted hair |
| मुकुट | मुकुट | crowns |
| सीसनि | सिरों पर | on their heads |
| सुभग | सुंदर | beautiful |
| उर | वक्षस्थल | chests |
| भुज | भुजाएँ | arms |
| नयन | नेत्र | eyes |
| बिसाल | विशाल | large; expansive |
2 सरद परब बिधु बदन बर लसत स्वेद कन जाल।।115।।
उनके सुंदर मुख शरद की पूर्णिमा के चंद्रमा के समान हैं; उन पर पसीने की अनेक बूँदें चमक रही हैं।
English explanation
Their lovely faces resemble the autumn full moon, with clusters of perspiration drops gleaming upon them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सरद | शरद ऋतु का | of autumn |
| परब | पूर्णिमा का पर्व | the full-moon occasion |
| बिधु | चंद्रमा | moon |
| बदन | मुख | faces |
| बर | सुंदर; श्रेष्ठ | lovely; excellent |
| लसत | चमकते हैं | gleam |
| स्वेद | पसीने के | of perspiration |
| कन | कण; छोटी बूँदें | tiny drops |
| जाल | समूह | clusters |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 115
- स्रोत अभिलेख
- 2.115
- सहायक विषय
- यमुनाको प्रणाम, वनवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 439, 439
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।