अयोध्याकाण्ड · दोहा 116 · दोहा/सोरठा
स्यामल गौर किसोर बर सुंदर सुषमा ऐन।
स्यामल गौर किसोर बर सुंदर सुषमा ऐन।
सरद सर्बरीनाथ मुखु सरद सरोरुह नैन।।116।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.116 · पुस्तक पृ. 439, 440
भावार्थ और शब्दार्थ
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1स्यामल गौर किसोर बर सुंदर सुषमा ऐन।
एक श्यामल और दूसरे गौर हैं; दोनों श्रेष्ठ, सुंदर किशोर और सौंदर्य की खान हैं।
English explanation
One is dark-hued and the other fair; both are splendid, handsome youths, veritable treasures of beauty.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| स्यामल | श्याम वर्ण वाले राम | dark-hued Rama |
| गौर | गौर वर्ण वाले लक्ष्मण | fair-complexioned Lakshmana |
| किसोर | किशोर अवस्था के | youthful |
| बर | श्रेष्ठ; उत्तम | excellent; splendid |
| सुंदर | सुंदर | handsome |
| सुषमा | सौंदर्य की | of beauty |
| ऐन | खान; भंडार | treasure-house |
2 सरद सर्बरीनाथ मुखु सरद सरोरुह नैन।।116।।
उनके मुख शरद् ऋतु के चंद्रमा जैसे और नेत्र शरद् ऋतु के कमलों जैसे हैं।
English explanation
Their faces are like the autumn moon, and their eyes like autumn lotuses.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सरद | शरद् ऋतु का | autumn’s |
| सर्बरीनाथ | चंद्रमा | moon |
| मुखु | मुख | faces |
| सरद | शरद् ऋतु के | autumn’s |
| सरोरुह | कमल | lotuses |
| नैन | नेत्र | eyes |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 116
- स्रोत अभिलेख
- 2.116
- सहायक विषय
- यमुनाको प्रणाम, वनवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 439, 440
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