अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बार बार सब लागहिं पाएँ। कहहिं बचन मृदु सरल सुभाएँ।।
मूल पाठ
बार बार सब लागहिं पाएँ। कहहिं बचन मृदु सरल सुभाएँ।।
राजकुमारि बिनय हम करहीं। तिय सुभायँ कछु पूँछत डरहीं।
स्रोत अभिलेख 2.116 · पुस्तक पृ. 439, 440
भावार्थ
मूल पाठ के बादबार-बार सब उनके पाँव लगतीं और सहज ही सीधे-सादे कोमल वचन कहती हैं—हे राजकुमारी! हम विनती करती (कुछ निवेदन करना चाहती) हैं, परन्तु स्त्री-स्वभावके कारण कुछ पूछते हुए डरती हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 440 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बार बार सब लागहिं पाएँ। कहहिं बचन मृदु सरल सुभाएँ।।
English explanation
They all repeatedly touch Sita’s feet and speak gentle words with unaffected sincerity.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बार | बार | time |
| बार | बार; पुनः | after time; again |
| सब | सभी स्त्रियाँ | all the women |
| लागहिं | लगती हैं; छूती हैं | touch; bow at |
| पाएँ | चरणों में | the feet |
| कहहिं | कहती हैं | say |
| बचन | वचन | words |
| मृदु | कोमल | gentle |
| सरल | सरल; निष्कपट | simple; sincere |
| सुभाएँ | भाव से | in manner and spirit |
2 राजकुमारि बिनय हम करहीं। तिय सुभायँ कछु पूँछत डरहीं।
English explanation
Princess, we make a humble request; owing to our womanly reserve, we are afraid to ask something.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राजकुमारि | हे राजकुमारी | O princess |
| बिनय | विनती | a humble request |
| हम | हम | we |
| करहीं | करती हैं | make |
| तिय | स्त्रियों के | women’s |
| सुभायँ | स्वभाव के कारण | owing to natural disposition |
| कछु | कुछ | something |
| पूँछत | पूछते हुए | in asking |
| डरहीं | डरती हैं | are afraid |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.116
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 440
- सहायक विषय
- यमुनाको प्रणाम, वनवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 439, 440
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।