अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तौ भल जतनु करब सुबिचारी। मोरें सौचु भरत कर भारी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दतो भलीभाँति खूब विचारकर ऐसा यत्न करें। मुझे भरतका अत्यधिक सोच है। भरतके मनमें गूढ़ प्रेम है। उनके घर रहनेमें मुझे भलाई नहीं जान पड़ती (यह डर लगता है कि उनके प्राणोंको कोई भय न हो जाय)॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 581 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
तौ भल जतनु करब सुबिचारी। मोरें सौचु भरत कर भारी।।
गूढ़ सनेह भरत मन माही। रहें नीक मोहि लागत नाहीं।।
स्रोत अभिलेख 2.284 · पुस्तक पृ. 580, 581
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 तौ भल जतनु करब सुबिचारी। मोरें सौचु भरत कर भारी।।
English explanation
Then consider it carefully and make a suitable effort; I am deeply concerned about Bharata.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तौ | तो | then |
| भल | अच्छा; उचित | good; suitable |
| जतनु | प्रयत्न | effort |
| करब | कीजिए | please make |
| सुबिचारी | भली तरह विचार करके | after careful consideration |
| मोरें | मुझे | to me |
| सौचु | चिंता | concern |
| भरत | भरत | Bharata |
| कर | की | about; concerning |
| भारी | बहुत अधिक | very great |
2 गूढ़ सनेह भरत मन माही। रहें नीक मोहि लागत नाहीं।।
English explanation
Bharata has deep love in his heart; his remaining here does not seem good to me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गूढ़ | गहरा; अंतर्निहित | deep; inward |
| सनेह | प्रेम | love |
| भरत | भरत के | Bharata’s |
| मन | मन | heart |
| माही | में | in |
| रहें | उनके यहाँ रहने से | with his remaining here |
| नीक | अच्छा | good |
| मोहि | मुझे | to me |
| लागत | लगता | seems |
| नाहीं | नहीं | not |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.284
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 581
- सहायक विषय
- कौसल्या-सुनयना-संवाद, श्रीसीताजीका शील
- मुद्रित पृष्ठ
- 580, 581
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।