अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
लखि सुभाउ सुनि सरल सुबानी। सब भइ मगन करुन रस रानी।।
मूल पाठ
लखि सुभाउ सुनि सरल सुबानी। सब भइ मगन करुन रस रानी।।
नभ प्रसून झरि धन्य धन्य धुनि। सिथिल सनेहँ सिद्ध जोगी मुनि।।
स्रोत अभिलेख 2.284 · पुस्तक पृ. 580, 581
भावार्थ
मूल पाठ के बादकौसल्याजीका स्वभाव देखकर और उनकी सरल और उत्तम वाणीको सुनकर सब रानियाँ करुणरसमें निमग्र हो गयीं। आकाशसे पुष्पवर्षाकी झड़ी लग गयी और धन्य-धन्यकी ध्वनि होने लगी। सिद्ध, योगी और मुनि स्नेहसे शिथिल हो गये॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 581 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 लखि सुभाउ सुनि सरल सुबानी। सब भइ मगन करुन रस रानी।।
English explanation
Seeing her disposition and hearing her simple, gracious words, all the queens became immersed in tender sorrow.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लखि | देखकर | seeing |
| सुभाउ | स्वभाव | disposition |
| सुनि | सुनकर | hearing |
| सरल | सरल; निष्कपट | simple; sincere |
| सुबानी | सुंदर वाणी | gracious speech |
| सब | सभी | all |
| भइ | हो गईं | became |
| मगन | डूबी हुई | immersed |
| करुन | करुण | sorrowful; compassionate |
| रस | भाव में | in the emotional mood |
| रानी | रानियाँ | queens |
2 नभ प्रसून झरि धन्य धन्य धुनि। सिथिल सनेहँ सिद्ध जोगी मुनि।।
English explanation
Flowers showered from the sky amid cries of ‘Blessed! Blessed!’; perfected sages, yogis, and seers were overcome by affection.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नभ | आकाश से | from the sky |
| प्रसून | फूल | flowers |
| झरि | झरने लगे | showered down |
| धन्य | धन्य! | Blessed! |
| धन्य | धन्य! | Blessed! |
| धुनि | पुकार; ध्वनि | cry; sound |
| सिथिल | शिथिल; भावविह्वल | overcome; weakened |
| सनेहँ | स्नेह से | through affection |
| सिद्ध | सिद्ध पुरुष | spiritually perfected sages |
| जोगी | योगी | yogis |
| मुनि | मुनि | seers |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.284
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 581
- सहायक विषय
- कौसल्या-सुनयना-संवाद, श्रीसीताजीका शील
- मुद्रित पृष्ठ
- 580, 581
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।