अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सबु रनिवासु बिथकि लखि रहेऊ। तब धरि धीर सुमित्राँ कहेऊ।।
मूल पाठ
सबु रनिवासु बिथकि लखि रहेऊ। तब धरि धीर सुमित्राँ कहेऊ।।
देबि दंड जुग जामिनि बीती। राम मातु सुनी उठी सप्रीती।।
स्रोत अभिलेख 2.284 · पुस्तक पृ. 580, 581
भावार्थ
मूल पाठ के बादसारा रनिवास देखकर थकित रह गया (निस्तब्ध हो गया), तब सुमित्राजीने धीरज धरके कहा कि हे देवि! दो घड़ी रात बीत गयी है। यह सुनकर श्रीरामजीकी माता कौसल्याजी प्रेमपूर्वक उठीं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 581 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सबु रनिवासु बिथकि लखि रहेऊ। तब धरि धीर सुमित्राँ कहेऊ।।
English explanation
The entire assembly of queens remained watching, distressed and overwhelmed; then Sumitra composed herself and spoke.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सबु | समस्त | the entire |
| रनिवासु | रानी-समाज | assembly of queens |
| बिथकि | व्याकुल और निढाल होकर | distressed and exhausted |
| लखि | देखते | watching |
| रहेऊ | रह गया | remained |
| तब | तब | then |
| धरि | धारण करके | mustering |
| धीर | धैर्य | composure |
| सुमित्राँ | सुमित्रा ने | Sumitra, Lakshmana’s mother |
| कहेऊ | कहा | said |
2 देबि दंड जुग जामिनि बीती। राम मातु सुनी उठी सप्रीती।।
English explanation
‘O lady, two dandas of the night have passed.’ Hearing this, Rama’s mother rose affectionately.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देबि | हे देवी | O lady |
| दंड | दंड, समय की इकाई | danda, a unit of time |
| जुग | दो; एक जोड़ा | two; a pair |
| जामिनि | रात | night |
| बीती | बीत गई | has elapsed |
| राम | राम की | Rama’s |
| मातु | माता, कौसल्या | mother, Kaushalya |
| सुनी | सुनकर | having heard |
| उठी | उठीं | rose |
| सप्रीती | प्रेमपूर्वक | with affection |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.284
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 581
- सहायक विषय
- कौसल्या-सुनयना-संवाद, श्रीसीताजीका शील
- मुद्रित पृष्ठ
- 580, 581
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।