अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
ते पितु मातु कहहु सखि कैसे। जिन्ह पठए बन बालक ऐसे।।
मूल पाठ
ते पितु मातु कहहु सखि कैसे। जिन्ह पठए बन बालक ऐसे।।
राम लखन सिय रूपु निहारी। होहिं सनेह बिकल नर नारी।।
स्रोत अभिलेख 2.111 · पुस्तक पृ. 435, 436
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[इधर गाँवकी स्त्रियाँ कह रही हैं—] हे सखी! कहो तो,वे माता-पिता कैसे हैं जिन्होंने ऐसे (सुन्दर सुकुमार) बालकोंको वनमें भेज दिया है। श्रीरामजी, लक्ष्मणजी और सीताजीके रूपको देखकर सब स्त्री-पुरुष स्नेहसे व्याकुल हो जाते हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 436 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 ते पितु मातु कहहु सखि कैसे। जिन्ह पठए बन बालक ऐसे।।
English explanation
Tell me, friend, what sort of parents are they who sent such children into the forest?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ते | वे | those |
| पितु | पिता | father |
| मातु | माता | mother |
| कहहु | बताओ | tell me |
| सखि | हे सखी | friend |
| कैसे | कैसे हैं | what sort are they |
| जिन्ह | जिन्होंने | who |
| पठए | भेज दिए | sent |
| बन | वन में | into the forest |
| बालक | बालकों को | the children |
| ऐसे | ऐसे | such |
2 राम लखन सिय रूपु निहारी। होहिं सनेह बिकल नर नारी।।
English explanation
Beholding the beauty of Rama, Lakshmana, and Sita, men and women become overwhelmed with affection.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | श्रीराम | Rama |
| लखन | लक्ष्मण | Lakshmana, Rama’s younger brother |
| सिय | सीता | Sita, Rama’s wife |
| रूपु | सुंदर रूप | beauty |
| निहारी | देखकर | beholding |
| होहिं | हो जाते हैं | become |
| सनेह | प्रेम से | with affection |
| बिकल | व्याकुल | overwhelmed |
| नर | पुरुष | men |
| नारी | स्त्रियाँ | women |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.111
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 436
- सहायक विषय
- तापस-प्रकरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 435, 436
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।