अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कीन्ह निषाद दंडवत तेही। मिलेउ मुदित लखि राम सनेही।।
मूल पाठ
कीन्ह निषाद दंडवत तेही। मिलेउ मुदित लखि राम सनेही।।
पिअत नयन पुट रूपु पियूषा। मुदित सुअसनु पाइ जिमि भूखा।।
स्रोत अभिलेख 2.111 · पुस्तक पृ. 435, 436
भावार्थ
मूल पाठ के बादफिर निषादराजने उसको दण्डवत् की। श्रीरामचन्द्रजीका प्रेमी जानकर वह उस (निषाद) से आनन्दित होकर मिला। वह तपस्वी अपने नेत्ररूपी दोनोंसे श्रीरामजीकी सौन्दर्य-सुधाका पान करने लगा और ऐसा आनन्दित हुआ जैसे कोई भूखा आदमी सुन्दर भोजन पाकर आनन्दित होता है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 436 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कीन्ह निषाद दंडवत तेही। मिलेउ मुदित लखि राम सनेही।।
English explanation
The Nishada chief prostrated himself before him. Recognizing the chief as one who loved Rama, he met him joyfully.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कीन्ह | किया | performed |
| निषाद | निषादराज गुह ने | Guha, the Nishada chief |
| दंडवत | साष्टांग प्रणाम | full prostration |
| तेही | उसको | to him |
| मिलेउ | वह मिला | he met him |
| मुदित | प्रसन्न होकर | joyfully |
| लखि | देखकर पहचानते हुए | recognizing |
| राम | राम का | of Rama |
| सनेही | प्रेमी | one who loves |
2 पिअत नयन पुट रूपु पियूषा। मुदित सुअसनु पाइ जिमि भूखा।।
English explanation
He drank the nectar of their beauty through the cups of his eyes, delighted like a hungry person who has obtained excellent food.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पिअत | पी रहा था | was drinking |
| नयन | नेत्र | eyes |
| पुट | पात्रों से | through cups |
| रूपु | सुंदर रूप | beauty |
| पियूषा | अमृत | nectar |
| मुदित | प्रसन्न | delighted |
| सुअसनु | उत्तम भोजन | excellent food |
| पाइ | पाकर | having obtained |
| जिमि | जैसे | like |
| भूखा | भूखा व्यक्ति | a hungry person |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.111
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 436
- सहायक विषय
- तापस-प्रकरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 435, 436
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।