अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बहुरि लखन पायन्ह सोइ लागा। लीन्ह उठाइ उमगि अनुरागा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दफिर वह लक्ष्मणजीके चरणों लगा। उन्होंने प्रेमसे उमँगकर उसको उठा लिया। फिर उसने सीताजीकी चरणधूलिको अपने सिरपर धारण किया। माता सीताजीने भी उसको अपना छोटा बच्चा जानकर आशीर्वाद दिया॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 435 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बहुरि लखन पायन्ह सोइ लागा। लीन्ह उठाइ उमगि अनुरागा।।
पुनि सिय चरन धूरि धरि सीसा। जननि जानि सिसु दीन्हि असीसा।।
स्रोत अभिलेख 2.111 · पुस्तक पृ. 435, 436
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बहुरि लखन पायन्ह सोइ लागा। लीन्ह उठाइ उमगि अनुरागा।।
English explanation
Then that same person bowed at Lakshmana’s feet; Lakshmana lifted him up with overflowing affection.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बहुरि | फिर | then |
| लखन | लक्ष्मण के | Lakshmana’s |
| पायन्ह | चरणों में | at the feet |
| सोइ | वही व्यक्ति | that same person |
| लागा | प्रणाम करने लगा | bowed |
| लीन्ह | ले लिया | took him |
| उठाइ | उठाकर | lifting him up |
| उमगि | उमड़कर | welling up |
| अनुरागा | प्रेम | affection |
2 पुनि सिय चरन धूरि धरि सीसा। जननि जानि सिसु दीन्हि असीसा।।
English explanation
Then he placed the dust of Sita’s feet upon his head. Mother Sita, regarding him as her child, blessed him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | then |
| सिय | सीता के | Sita’s |
| चरन | चरणों की | of the feet |
| धूरि | धूल | dust |
| धरि | रखकर | placing |
| सीसा | सिर पर | upon his head |
| जननि | माता सीता ने | Mother Sita |
| जानि | समझकर | regarding him as |
| सिसु | बालक | her child |
| दीन्हि | दिया | gave |
| असीसा | आशीर्वाद | a blessing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.111
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 435
- सहायक विषय
- तापस-प्रकरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 435, 436
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।