अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम सप्रेम पुलकि उर लावा। परम रंक जनु पारसु पावा।।
मूल पाठ
राम सप्रेम पुलकि उर लावा। परम रंक जनु पारसु पावा।।
मनहुँ प्रेमु परमारथु दोऊ। मिलत धरे तन कह सबु कोऊ।।
स्रोत अभिलेख 2.111 · पुस्तक पृ. 435, 436
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरामजीने प्रेमपूर्वक पुलकित होकर उसको हृदयसे लगा लिया। [उसे इतना आनन्द हुआ] मानो कोई महादरिद्री मनुष्य पारस पा गया हो। सब कोई [देखनेवाले] कहने लगे कि मानो प्रेम और परमार्थ (परम तत्त्व) दोनों शरीर धारण करके मिल रहे हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 435 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 राम सप्रेम पुलकि उर लावा। परम रंक जनु पारसु पावा।।
English explanation
AI-draft meaning: Rama, thrilled with affection, clasped him to his heart, as though a destitute person had found the philosopher’s stone.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | श्रीराम ने | Rama |
| सप्रेम | प्रेम सहित | with affection |
| पुलकि | पुलकित होकर | thrilled with joy |
| उर | हृदय से | to his heart |
| लावा | लगा लिया | clasped |
| परम | अत्यंत | utterly |
| रंक | दरिद्र व्यक्ति | a destitute person |
| जनु | मानो | as though |
| पारसु | पारस पत्थर | the philosopher’s stone |
| पावा | पा गया हो | had obtained |
2 मनहुँ प्रेमु परमारथु दोऊ। मिलत धरे तन कह सबु कोऊ।।
English explanation
Everyone says it is as though love and the highest spiritual end have taken bodily form and are meeting.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मनहुँ | मानो | as though |
| प्रेमु | प्रेम | love |
| परमारथु | परम आध्यात्मिक लक्ष्य | the highest spiritual end |
| दोऊ | दोनों | both |
| मिलत | मिल रहे हों | are meeting |
| धरे | धारण किए हुए | having assumed |
| तन | शरीर | bodies |
| कह | कहता है | says |
| सबु | सब | every |
| कोऊ | व्यक्ति | person |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.111
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 435
- सहायक विषय
- तापस-प्रकरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 435, 436
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।