अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तेहिं पुर बसत भरत बिनु रागा। चंचरीक जिमि चंपक बागा।।
मूल पाठ
तेहिं पुर बसत भरत बिनु रागा। चंचरीक जिमि चंपक बागा।।
रमा बिलासु राम अनुरागी। तजत बमन जिमि जन बड़भागी।।
स्रोत अभिलेख 2.324 · पुस्तक पृ. 614, 615
भावार्थ
मूल पाठ के बादउसी अयोध्यापुरीमें भरतजी अनासक्त होकर इस प्रकार निवास कर रहे हैं जैसे चम्पाके बागमें भौंरा। श्रीरामचन्द्रजीके प्रेमी बड़भागी पुरुष लक्ष्मीके विलास [भोगैश्वर्य] को वमनकी भाँति त्याग देते हैं (फिर उसकी ओर ताकते भी नहीं)॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 615 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 तेहिं पुर बसत भरत बिनु रागा। चंचरीक जिमि चंपक बागा।।
English explanation
Bharata lived in that city without attachment, like a bee in a grove of champak trees.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेहिं | उसी | that very |
| पुर | नगर में | in the city |
| बसत | रहते थे | lived |
| भरत | राम के भाई भरत | Bharata, Rama’s brother |
| बिनु | बिना | without |
| रागा | आसक्ति | attachment |
| चंचरीक | भौंरा | bee |
| जिमि | जैसे | like |
| चंपक | चंपक के वृक्षों का | of champak trees |
| बागा | बाग | grove |
2 रमा बिलासु राम अनुरागी। तजत बमन जिमि जन बड़भागी।।
English explanation
Fortunate people devoted to Rama discard the luxuries of wealth as they would vomit.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रमा | लक्ष्मी का | of Lakshmi, goddess of wealth |
| बिलासु | वैभव-विलास | wealth and luxury |
| राम | राम से | to Rama |
| अनुरागी | प्रेम रखने वाले | devoted |
| तजत | त्याग देते हैं | discard |
| बमन | वमन; उलटी | vomit |
| जिमि | जैसे | like |
| जन | लोग; भक्तजन | people; devotees |
| बड़भागी | अत्यंत भाग्यवान | greatly fortunate |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.324
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 615
- सहायक विषय
- भरतजीका अयोध्या लौटना, भरतजीद्वारा पादुकाकी स्थापना, नन्दिग्राममें निवास और श्रीभरतजीके चरित्र-श्रवणकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 614, 615
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।