अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भूषन बसन भोग सुख भूरी। मन तन बचन तजे तिन तूरी।।
मूल पाठ
भूषन बसन भोग सुख भूरी। मन तन बचन तजे तिन तूरी।।
अवध राजु सुर राजु सिहाई। दसरथ धनु सुनि धनदु लजाई।।
स्रोत अभिलेख 2.324 · पुस्तक पृ. 614, 615
भावार्थ
मूल पाठ के बादगहने-कपड़े और अनेकों प्रकारके भोग-सुखोंको मन, तन और वचनसे तृण तोड़कर (प्रतिज्ञा करके) त्याग दिया। जिस अयोध्याके राज्यको देवराज इन्द्र सिहाते थे और [जहाँके राजा] दशरथजीकी सम्पत्ति सुनकर कुबेर भी लजा जाते थे,॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 615 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 भूषन बसन भोग सुख भूरी। मन तन बचन तजे तिन तूरी।।
English explanation
In thought, body, and speech, he discarded ornaments, fine clothing, enjoyments, and abundant comforts as mere straw.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भूषन | आभूषण | ornaments |
| बसन | वस्त्र | clothing |
| भोग | भोग-विलास | sensual enjoyments |
| सुख | सुख | comforts |
| भूरी | बहुत-से | abundant |
| मन | मन से | in thought |
| तन | शरीर से | in bodily conduct |
| बचन | वचन से | in speech |
| तजे | त्याग दिए | discarded |
| तिन | उन्होंने; भरत ने | he, Bharata |
| तूरी | तिनके के समान | like straw |
2 अवध राजु सुर राजु सिहाई। दसरथ धनु सुनि धनदु लजाई।।
English explanation
Even Indra, king of the gods, coveted Ayodhya’s kingdom, and Kubera, god of wealth, felt humbled on hearing of Dasharatha’s riches.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अवध | अवध का | of Ayodhya |
| राजु | राज्य | kingdom |
| सुर | देवताओं का | of the gods |
| राजु | राजा इंद्र | king, Indra |
| सिहाई | ललचाते थे; ईर्ष्या करते थे | coveted; envied |
| दसरथ | राजा दशरथ का | of King Dasharatha |
| धनु | धन | wealth |
| सुनि | सुनकर | on hearing |
| धनदु | धन के देवता कुबेर | Kubera, god of wealth |
| लजाई | लजा जाते थे | felt humbled |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.324
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 615
- सहायक विषय
- भरतजीका अयोध्या लौटना, भरतजीद्वारा पादुकाकी स्थापना, नन्दिग्राममें निवास और श्रीभरतजीके चरित्र-श्रवणकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 614, 615
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।