अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जटाजूट सिर मुनिपट धारी। महि खनि कुस साँथरी सँवारी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसिरपर जटाजूट और शरीरमें मुनियोंके [वल्कल] वस्त्र धारण कर, पृथ्वीको खोदकर उसके अंदर कुशकी आसनी बिछायी। भोजन, वस्त्र, बरतन, व्रत, नियम—सभी बातोंमें वे ऋषियोंके कठिन धर्मका प्रेमसहित आचरण करने लगे॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 614 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जटाजूट सिर मुनिपट धारी। महि खनि कुस साँथरी सँवारी।।
असन बसन बासन ब्रत नेमा। करत कठिन रिषिधरम सप्रेमा।।
स्रोत अभिलेख 2.324 · पुस्तक पृ. 614, 615
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जटाजूट सिर मुनिपट धारी। महि खनि कुस साँथरी सँवारी।।
English explanation
He wore a knot of matted hair on his head and an ascetic’s clothing; digging into the earth, he prepared a bed of sacred grass.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जटाजूट | जटाओं का जूड़ा | knot of matted hair |
| सिर | सिर पर | on the head |
| मुनिपट | मुनियों के वस्त्र | ascetic garments |
| धारी | धारण किए हुए | wearing |
| महि | भूमि | earth |
| खनि | खोदकर | having dug |
| कुस | कुश घास की | of sacred grass |
| साँथरी | बिछौना | bedding |
| सँवारी | तैयार किया | prepared |
2 असन बसन बासन ब्रत नेमा। करत कठिन रिषिधरम सप्रेमा।।
English explanation
In food, clothing, utensils, vows, and observances, he lovingly followed the rigorous discipline of sages.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| असन | भोजन | food |
| बसन | वस्त्र | clothing |
| बासन | पात्र; बरतन | utensils |
| ब्रत | व्रत | vows |
| नेमा | नियम | observances |
| करत | पालन करते थे | practised |
| कठिन | कठिन | rigorous |
| रिषिधरम | ऋषियों की जीवनचर्या | the discipline of sages |
| सप्रेमा | प्रेमपूर्वक | with love |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.324
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 614
- सहायक विषय
- भरतजीका अयोध्या लौटना, भरतजीद्वारा पादुकाकी स्थापना, नन्दिग्राममें निवास और श्रीभरतजीके चरित्र-श्रवणकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 614, 615
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।