अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम मातु गुर पद सिरु नाई। प्रभु पद पीठ रजायसु पाई।।
मूल पाठ
राम मातु गुर पद सिरु नाई। प्रभु पद पीठ रजायसु पाई।।
नंदिगावँ करि परन कुटीरा। कीन्ह निवासु धरम धुर धीरा।।
स्रोत अभिलेख 2.324 · पुस्तक पृ. 614, 615
भावार्थ
मूल पाठ के बादफिर श्रीरामजीकी माता कौसल्याजी और गुरुजीके चरणोंमें सिर नवाकर और प्रभुकी चरणपादुकाओंकी आज्ञा पाकर धर्मकी धुरी धारण करनेमें धीर भरतजीने नन्दिग्राममें पर्णकुटी बनाकर उसीमें निवास किया॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 614 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 राम मातु गुर पद सिरु नाई। प्रभु पद पीठ रजायसु पाई।।
English explanation
AI draft: Bharata bowed his head at the feet of Rama, the mothers, and the guru, and received the Lord’s sandals and permission to administer the kingdom.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | श्रीराम के | of Rama |
| मातु | माताओं के | of the mothers |
| गुर | गुरु के | of the guru |
| पद | चरणों में | at the feet |
| सिरु | सिर | head |
| नाई | झुकाकर | having bowed |
| प्रभु | प्रभु राम की | of Lord Rama |
| पद | चरण | feet |
| पीठ | पादुकाएँ | sandals |
| रजायसु | राजकार्य की आज्ञा | permission to administer the kingdom |
| पाई | पाकर | having received |
2 नंदिगावँ करि परन कुटीरा। कीन्ह निवासु धरम धुर धीरा।।
English explanation
Bharata, the steadfast bearer of duty, built a leaf hut in Nandigrama and made his dwelling there.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नंदिगावँ | नंदिगाँव में | in Nandigrama |
| करि | बनाकर | having made |
| परन | पत्तों की | of leaves |
| कुटीरा | कुटिया | hut |
| कीन्ह | किया | made |
| निवासु | निवास | dwelling |
| धरम | धर्म की | of duty |
| धुर | धुरी; भार | burden; responsibility |
| धीरा | धैर्यपूर्वक सँभालने वाले | steadfast bearer |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.324
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 614
- सहायक विषय
- भरतजीका अयोध्या लौटना, भरतजीद्वारा पादुकाकी स्थापना, नन्दिग्राममें निवास और श्रीभरतजीके चरित्र-श्रवणकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 614, 615
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।