अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तेउ सुनि सरन सामुहें आए। सकृत प्रनामु किहें अपनाए।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दउन्हें भी आपने शरणमें सम्मुख आया सुनकर एक बार प्रणाम करनेपर ही अपना लिया। उन (शरणागतों) के दोषोंको देखकर भी आप कभी हृदयमें नहीं लाये और उनके गुणोंको सुनकर साधुओंके समाजमें उनका बखान किया॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 593 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
तेउ सुनि सरन सामुहें आए। सकृत प्रनामु किहें अपनाए।।
देखि दोष कबहुँ न उर आने। सुनि गुन साधु समाज बखाने।।
स्रोत अभिलेख 2.299 · पुस्तक पृ. 593, 594
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 तेउ सुनि सरन सामुहें आए। सकृत प्रनामु किहें अपनाए।।
English explanation
Even they, hearing of your greatness, came before you for refuge; with a single bow, you accepted them as your own.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेउ | वे भी | even they |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| सरन | शरण लेने | for refuge |
| सामुहें | सामने, आपकी ओर | before you, turning toward you |
| आए | आए | came |
| सकृत | एक बार | once |
| प्रनामु | प्रणाम | a reverential bow |
| किहें | करने पर | upon making |
| अपनाए | आपने अपना लिया | you accepted as your own |
2 देखि दोष कबहुँ न उर आने। सुनि गुन साधु समाज बखाने।।
English explanation
Even seeing their faults, you never held them in your heart; hearing their virtues, you praised them in the assembly of the virtuous.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | having seen |
| दोष | दोषों को | their faults |
| कबहुँ | कभी | ever |
| न | नहीं | not |
| उर | हृदय में | in the heart |
| आने | लाए, ध्यान में रखा | brought to mind or held |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| गुन | गुणों को | their virtues |
| साधु | सज्जनों की | of the virtuous |
| समाज | सभा में | in the assembly |
| बखाने | प्रशंसा की | praised |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.299
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 593
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरत-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 593, 594
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।