अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तुहूँ सराहसि करसि सनेहू। अब सुनि मोहि भयउ संदेहू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दतू स्वयं भी रामकी सराहना करती और उनपर स्नेह किया करती थी। अब यह सुनकर मुझे सन्देह हो गया है [कि तुम्हारी प्रशंसा और स्नेह कहीं झूठे तो न थे?] जिसका स्वभाव शत्रुको भी अनुकूल है, वह माताके प्रतिकूल आचरण क्यों कर करेगा?॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 370 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
तुहूँ सराहसि करसि सनेहू। अब सुनि मोहि भयउ संदेहू।।
जासु सुभाउ अरिहि अनुकूला। सो किमि करिहि मातु प्रतिकूला।।
स्रोत अभिलेख 2.32 · पुस्तक पृ. 370, 371
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 तुहूँ सराहसि करसि सनेहू। अब सुनि मोहि भयउ संदेहू।।
English explanation
You too praise him and love him; now, hearing this, I have become doubtful.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुहूँ | तुम भी | you too |
| सराहसि | प्रशंसा करती हो | praise him |
| करसि | करती हो | feel |
| सनेहू | स्नेह | affection |
| अब | अब | now |
| सुनि | सुनकर | having heard this |
| मोहि | मुझे | in me |
| भयउ | उत्पन्न हुआ | has arisen |
| संदेहू | संदेह | doubt |
2 जासु सुभाउ अरिहि अनुकूला। सो किमि करिहि मातु प्रतिकूला।।
English explanation
How could one whose nature is kindly even toward an enemy act against his mother?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जासु | जिसका | whose |
| सुभाउ | स्वभाव | nature |
| अरिहि | शत्रु के प्रति भी | even toward an enemy |
| अनुकूला | हितकारी, अनुकूल | kindly and favorable |
| सो | वह | he |
| किमि | कैसे | how |
| करिहि | करेगा | will act |
| मातु | माता के प्रति | toward his mother |
| प्रतिकूला | विरुद्ध, अहितकारी व्यवहार | adversely or harmfully |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.32
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 370
- सहायक विषय
- दशरथ-कैकेयी-संवाद और दशरथ-शोक, सुमन्त्रका महलमें जाना और वहाँसे लौटकर श्रीरामजीको महलमें भेजना
- मुद्रित पृष्ठ
- 370, 371
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।