मूल पाठ · शब्दार्थ · भावार्थ
अयोध्याकाण्ड 2.32
AI प्रारूपये संदर्भानुसार AI द्वारा बनाए गए शब्दार्थ और भावार्थ हैं। विद्वान की समीक्षा बाकी है; त्रुटियाँ संभव हैं।94 / 94 शब्दों के अर्थ उपलब्ध
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चौपाई
। ।।
| अवधी / मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम भी | you too | |
| प्रशंसा करती हो | praise him | |
| करती हो | feel | |
| स्नेह | affection | |
| अब | now | |
| सुनकर | having heard this | |
| मुझे | in me | |
| उत्पन्न हुआ | has arisen | |
| संदेह | doubt |
भावार्थ
तुम भी उनकी प्रशंसा करती हो और उनसे स्नेह रखती हो; अब यह सुनकर मुझे संदेह हुआ है।
You too praise him and love him; now, hearing this, I have become doubtful.
। ।।
| अवधी / मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जिसका | whose | |
| स्वभाव | nature | |
| शत्रु के प्रति भी | even toward an enemy | |
| हितकारी, अनुकूल | kindly and favorable | |
| वह | he | |
| कैसे | how | |
| करेगा | will act | |
| माता के प्रति | toward his mother | |
| विरुद्ध, अहितकारी व्यवहार | adversely or harmfully |
भावार्थ
जिसका स्वभाव शत्रु के प्रति भी अनुकूल है, वह माता के विरुद्ध कैसे कुछ करेगा?
How could one whose nature is kindly even toward an enemy act against his mother?
दोहा/सोरठा
।
| अवधी / मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हे प्रिये | beloved | |
| परिहास | jest | |
| क्रोध | anger | |
| छोड़ दो | set aside | |
| माँगो | ask for | |
| विचार करके | having reflected | |
| विवेक से | with discernment |
भावार्थ
प्रिये, परिहास और क्रोध छोड़ो; विवेक से विचार करके ऐसा वर माँगो—
Beloved, set aside jest and anger; reflect with discernment and ask for a boon—
।।32।।
| अवधी / मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जिससे | so that | |
| मैं देख सकूँ | I may behold | |
| अब | now | |
| आँखें | eyes | |
| भरकर, जी भरकर | fully, to my heart’s content | |
| भरत का | Bharata’s | |
| राज्य का | royal | |
| अभिषेक, राजतिलक | consecration, coronation |
भावार्थ
जिससे मैं अब भरत का राज्याभिषेक आँख भरकर देख सकूँ।
—so that I may now behold Bharata’s royal consecration to my heart’s content.