अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तुलसी तरुबर बिबिध सुहाए। कहुँ कहुँ सियँ कहुँ लखन लगाए।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दवहाँ तुलसीजीके बहुत-से सुन्दर वृक्ष सुशोभित हैं, जो कहीं-कहीं सीताजीने और कहीं लक्ष्मणजीने लगाये हैं। इसी बड़की छायामें सीताजीने अपने करकमलोंसे सुन्दर वेदी बनायी है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 541 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
तुलसी तरुबर बिबिध सुहाए। कहुँ कहुँ सियँ कहुँ लखन लगाए।।
बट छायाँ बेदिका बनाई। सियँ निज पानि सरोज सुहाई।।
स्रोत अभिलेख 2.237 · पुस्तक पृ. 541, 541
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तुलसी तरुबर बिबिध सुहाए। कहुँ कहुँ सियँ कहुँ लखन लगाए।।
English explanation
There are holy basil plants and various lovely trees, planted in some places by Sita and in others by Lakshmana.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुलसी | तुलसी के पौधे | holy basil plants |
| तरुबर | सुंदर वृक्ष | fine trees |
| बिबिध | विभिन्न प्रकार के | of various kinds |
| सुहाए | सुंदर | lovely |
| कहुँ | कहीं | here and there |
| कहुँ | कहीं | in some places |
| सियँ | सीता ने | by Sita |
| कहुँ | कहीं | in other places |
| लखन | लक्ष्मण ने | by Lakshmana |
| लगाए | लगाए हैं | have been planted |
2 बट छायाँ बेदिका बनाई। सियँ निज पानि सरोज सुहाई।।
English explanation
In the banyan’s shade, Sita has made a lovely raised platform with her own lotus-like hands.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बट | बरगद की | of the banyan |
| छायाँ | छाया में | in the shade |
| बेदिका | ऊँचा चबूतरा | raised platform |
| बनाई | बनाई | made |
| सियँ | सीता ने | Sita |
| निज | अपने | her own |
| पानि | हाथों से | with her hands |
| सरोज | कमल-जैसे | lotus-like |
| सुहाई | सुंदर | lovely |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.237
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 541
- सहायक विषय
- भरतजीका मन्दाकिनी-स्नान, चित्रकूटमें पहुँचना, भरतादि सबका परस्पर मिलाप, पिताका शोक और श्राद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 541, 541
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