अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मानहुँ तिमिर अरुनमय रासी। बिरची बिधि सँकेलि सुषमा सी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दमानो ब्रह्माजीने परम शोभाको एकत्र करके अन्धकार और लालिमामयी राशि-सी रच दी है। हे गुसाईं! ये वृक्ष नदीके समीप हैं, जहाँ श्रीरामकी पर्णकुटी छायी है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 541 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
मानहुँ तिमिर अरुनमय रासी। बिरची बिधि सँकेलि सुषमा सी।।
ए तरु सरित समीप गोसाँई। रघुबर परनकुटी जहँ छाई।।
स्रोत अभिलेख 2.237 · पुस्तक पृ. 541, 541
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 मानहुँ तिमिर अरुनमय रासी। बिरची बिधि सँकेलि सुषमा सी।।
English explanation
It is as though Brahma had gathered beauty together and fashioned this mass of darkness and crimson.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मानहुँ | मानो | as though |
| तिमिर | अंधकार | darkness |
| अरुनमय | लालिमा से भरी | filled with crimson |
| रासी | राशि | mass |
| बिरची | रची हो | had fashioned |
| बिधि | सृष्टिकर्ता ब्रह्मा ने | Brahma, the creator |
| सँकेलि | समेटकर | gathering together |
| सुषमा | सुंदरता | beauty |
| सी | सी; मानो ऐसी | as if; such a |
2 ए तरु सरित समीप गोसाँई। रघुबर परनकुटी जहँ छाई।।
English explanation
My lord, these trees are near the river, where Rama’s leaf-thatched hut stands.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ए | ये | these |
| तरु | वृक्ष | trees |
| सरित | नदी के | the river |
| समीप | निकट | near |
| गोसाँई | हे स्वामी | my lord |
| रघुबर | रघुकुलश्रेष्ठ राम की | of Rama, foremost of Raghu’s lineage |
| परनकुटी | पत्तों की कुटिया | leaf hut |
| जहँ | जहाँ | where |
| छाई | छाई हुई है | is thatched |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.237
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 541
- सहायक विषय
- भरतजीका मन्दाकिनी-स्नान, चित्रकूटमें पहुँचना, भरतादि सबका परस्पर मिलाप, पिताका शोक और श्राद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 541, 541
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