अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जिन्ह तरुबरन्ह मध्य बटु सोहा। मंजु बिसाल देखि मनु मोहा।।
मूल पाठ
जिन्ह तरुबरन्ह मध्य बटु सोहा। मंजु बिसाल देखि मनु मोहा।।
नील सघन पल्ल्व फल लाला। अबिरल छाहँ सुखद सब काला।।
स्रोत अभिलेख 2.237 · पुस्तक पृ. 541, 541
भावार्थ
मूल पाठ के बादजिन श्रेष्ठ वृक्षोंके बीचमें एक सुन्दर विशाल बड़का वृक्ष सुशोभित है, जिसको देखकर मन मोहित हो जाता है, उसके पत्ते नीले और सघन हैं और उसमें लाल फल लगे हैं। उसकी घनी छाया सब ऋतुओंमें सुख देनेवाली है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 541 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जिन्ह तरुबरन्ह मध्य बटु सोहा। मंजु बिसाल देखि मनु मोहा।।
English explanation
Among those fine trees stands a lovely, immense banyan, whose sight captivates the heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जिन्ह | जिन | those |
| तरुबरन्ह | श्रेष्ठ वृक्षों के | fine trees |
| मध्य | बीच | among |
| बटु | बरगद | banyan tree |
| सोहा | शोभित है | stands resplendent |
| मंजु | सुंदर | lovely |
| बिसाल | विशाल | immense |
| देखि | देखकर | on seeing |
| मनु | मन | the heart |
| मोहा | मोहित हो जाता है | is captivated |
2 नील सघन पल्ल्व फल लाला। अबिरल छाहँ सुखद सब काला।।
English explanation
Its foliage is dark green and dense, and its fruits are red; its unbroken shade is pleasant at all times.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नील | गहरे हरित | dark green |
| सघन | घने | dense |
| पल्ल्व | पत्ते | foliage |
| फल | फल | fruits |
| लाला | लाल | red |
| अबिरल | निरंतर घनी | unbroken and dense |
| छाहँ | छाया | shade |
| सुखद | सुख देनेवाली | pleasant |
| सब | सभी | all |
| काला | समयों में | at times |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.237
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 541
- सहायक विषय
- भरतजीका मन्दाकिनी-स्नान, चित्रकूटमें पहुँचना, भरतादि सबका परस्पर मिलाप, पिताका शोक और श्राद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 541, 541
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