अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तुम्ह जो हमहि बड़ि बिनय सुनाई। कृपा कीन्हि मोहि दीन्हि बड़ाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दतुमने जो मुझको बड़ी विनती सुनायी, यह तो मुझपर कृपा की और मुझे बड़ाई दी है। तो भी हे देवि! मैं अपनी वाणी सफल होनेके लिये तुम्हें आशीर्वाद दूँगी॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 429 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
तुम्ह जो हमहि बड़ि बिनय सुनाई। कृपा कीन्हि मोहि दीन्हि बड़ाई।।
तदपि देबि मैं देबि असीसा। सफल होपन हित निज बागीसा।।
स्रोत अभिलेख 2.103 · पुस्तक पृ. 429, 429
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 तुम्ह जो हमहि बड़ि बिनय सुनाई। कृपा कीन्हि मोहि दीन्हि बड़ाई।।
English explanation
“By addressing such a humble prayer to me, you have shown me kindness and bestowed honor upon me.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्ह | तुमने | you |
| जो | जो | in that |
| हमहि | मुझे | to me |
| बड़ि | बहुत बड़ी | so great a |
| बिनय | विनम्र प्रार्थना | humble prayer |
| सुनाई | सुनाई | addressed |
| कृपा | कृपा | kindness |
| कीन्हि | की | showed |
| मोहि | मुझे | upon me |
| दीन्हि | दी | bestowed |
| बड़ाई | सम्मान | honor |
2 तदपि देबि मैं देबि असीसा। सफल होपन हित निज बागीसा।।
English explanation
“Nevertheless, O goddess, I shall give a blessing to make my own speech fruitful.” (The reading ‘होपन’ is uncertain.)
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तदपि | फिर भी | nevertheless |
| देबि | हे देवी | O goddess |
| मैं | मैं | I |
| देबि | दूँगी | shall give |
| असीसा | आशीर्वाद | a blessing |
| सफल | सफल | fruitful |
| होपन | होने | becoming |
| हित | के लिए | for the purpose of |
| निज | अपनी | my own |
| बागीसा | वाणी | speech |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.103
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 429
- सहायक विषय
- केवटका प्रेम और गङ्गा-पार जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 429, 429
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।