अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तुम्ह कानन गवनहु दोउ भाई। फेरिअहिं लखन सीय रघुराई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दअत: तुम दोनों भाई (भरत-शत्रुघ्र) वनको जाओ और लक्ष्मण, सीता और श्रीरामचन्द्रको लौटा दिया जाय। ये सुन्दर वचन सुनकर दोनों भाई हर्षित हो गये। उनके सारे अंग परमानन्दसे परिपूर्ण हो गये॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 557 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
तुम्ह कानन गवनहु दोउ भाई। फेरिअहिं लखन सीय रघुराई।।
सुनि सुबचन हरषे दोउ भ्राता। भे प्रमोद परिपूरन गाता।।
स्रोत अभिलेख 2.256 · पुस्तक पृ. 557, 558
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तुम्ह कानन गवनहु दोउ भाई। फेरिअहिं लखन सीय रघुराई।।
English explanation
You two brothers should go to the forest, and Lakshmana, Sita, and Rama should be brought back.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्ह | तुम, भरत और शत्रुघ्न | you, Bharata and Shatrughna |
| कानन | वन में | to the forest |
| गवनहु | जाओ | go |
| दोउ | दोनों | both |
| भाई | भाई | brothers |
| फेरिअहिं | लौटाए जाएँ | should be brought back |
| लखन | लक्ष्मण, राम के भाई | Lakshmana, Rama’s brother |
| सीय | सीता, राम की पत्नी | Sita, Rama’s wife |
| रघुराई | राम, रघुवंश के स्वामी | Rama, lord of Raghu’s lineage |
2 सुनि सुबचन हरषे दोउ भ्राता। भे प्रमोद परिपूरन गाता।।
English explanation
Hearing these gracious words, both brothers rejoiced; their bodies became filled with delight.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| सुबचन | सुंदर, हितकारी वचन | gracious, beneficial words |
| हरषे | हर्षित हुए | rejoiced |
| दोउ | दोनों | both |
| भ्राता | भाई, भरत और शत्रुघ्न | brothers, Bharata and Shatrughna |
| भे | हो गए | became |
| प्रमोद | आनंद से | with delight |
| परिपूरन | पूरी तरह भरे हुए | completely filled |
| गाता | शरीर, अंग | bodies; limbs |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.256
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 557
- सहायक विषय
- श्रीवसिष्ठजीका भाषण
- मुद्रित पृष्ठ
- 557, 558
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।