अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तात बात फुरि राम कृपाहीं। राम बिमुख सिधि सपनेहुँ नाहीं।।
मूल पाठ
तात बात फुरि राम कृपाहीं। राम बिमुख सिधि सपनेहुँ नाहीं।।
सकुचउँ तात कहत एक बाता। अरध तजहिं बुध सरबस जाता।।
स्रोत अभिलेख 2.256 · पुस्तक पृ. 557, 558
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[वे बोले—] हे तात! बात सत्य है, पर है रामजीकी कृपासे ही। रामविमुखको तो स्वप्रमें भी सिद्धि नहीं मिलती। हे तात! मैं एक बात कहनेमें सकुचाता हूँ। बुद्धिमान् लोग सर्वस्व जाता देखकर [आधेकी रक्षाके लिये] आधा छोड़ दिया करते हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 557 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तात बात फुरि राम कृपाहीं। राम बिमुख सिधि सपनेहुँ नाहीं।।
English explanation
Dear son, this can come true only through Rama’s grace; one who turns away from Rama finds no success even in a dream.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तात | हे तात, प्रिय पुत्र | dear son |
| बात | यह बात, प्रस्ताव | this statement or proposal |
| फुरि | सत्य, साकार | true; realized |
| राम | भगवान राम की | of Lord Rama |
| कृपाहीं | कृपा से ही | only through grace |
| राम | राम से | from Rama |
| बिमुख | विमुख, मुँह मोड़े हुए | turned away |
| सिधि | सिद्धि, सफलता | success; accomplishment |
| सपनेहुँ | स्वप्न में भी | even in a dream |
| नाहीं | नहीं होती | does not occur |
2 सकुचउँ तात कहत एक बाता। अरध तजहिं बुध सरबस जाता।।
English explanation
Dear son, I hesitate to say one thing: when all is being lost, the wise relinquish half.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सकुचउँ | मैं संकोच करता हूँ | I hesitate |
| तात | हे तात | dear son |
| कहत | कहते हुए | while saying |
| एक | एक | one |
| बाता | बात | thing; statement |
| अरध | आधा | half |
| तजहिं | छोड़ देते हैं | relinquish |
| बुध | बुद्धिमान लोग | the wise |
| सरबस | सर्वस्व, सब कुछ | everything |
| जाता | जाता हुआ देखकर | when being lost |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.256
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 557
- सहायक विषय
- श्रीवसिष्ठजीका भाषण
- मुद्रित पृष्ठ
- 557, 558
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।