अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तुम्ह अपराध जोगु नहिं ताता। जननी जनक बंधु सुखदाता।।
मूल पाठ
तुम्ह अपराध जोगु नहिं ताता। जननी जनक बंधु सुखदाता।।
राम सत्य सबु जो कछु कहहू। तुम्ह पितु मातु बचन रत अहहू।।
स्रोत अभिलेख 2.43 · पुस्तक पृ. 379, 380
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे तात! तुम अपराधके योग्य नहीं हो (तुमसे माता-पिताका अपराध बन पड़े, यह सम्भव नहीं)। तुम तो माता-पिता और भाइयोंको सुख देनेवाले हो। हे राम! तुम जो कुछ कह रहे हो, सब सत्य है। तुम पिता-माताके वचनों [के पालन] में तत्पर हो॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 379 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 तुम्ह अपराध जोगु नहिं ताता। जननी जनक बंधु सुखदाता।।
English explanation
Dear son, you are not capable of wrongdoing; you bring happiness to your mother, father, and relatives.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्ह | तुम | you |
| अपराध | अपराध करने के | of wrongdoing |
| जोगु | योग्य; समर्थ | capable |
| नहिं | नहीं | not |
| ताता | हे पुत्र | dear son |
| जननी | माता को | to your mother |
| जनक | पिता को | to your father |
| बंधु | बंधुओं को | to your relatives |
| सुखदाता | सुख देने वाले | one who brings happiness |
2 राम सत्य सबु जो कछु कहहू। तुम्ह पितु मातु बचन रत अहहू।।
English explanation
Rama, everything you say is true; you are devoted to obeying your father’s and mother’s words.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | हे राम | O Rama |
| सत्य | सत्य | true |
| सबु | सब | all |
| जो | जो | that which |
| कछु | कुछ | whatever |
| कहहू | तुम कहते हो | you say |
| तुम्ह | तुम | you |
| पितु | पिता के | your father’s |
| मातु | माता के | your mother’s |
| बचन | वचनों के पालन में | in obeying the words |
| रत | तत्पर; अनुरक्त | devoted |
| अहहू | हो | are |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.43
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 379
- सहायक विषय
- श्रीराम-कैकेयी-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 379, 380
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।