अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रहसी रानि राम रुख पाई। बोली कपट सनेहु जनाई।।
मूल पाठ
रहसी रानि राम रुख पाई। बोली कपट सनेहु जनाई।।
सपथ तुम्हार भरत कै आना। हेतु न दूसर मै कछु जाना।।
स्रोत अभिलेख 2.43 · पुस्तक पृ. 379, 380
भावार्थ
मूल पाठ के बादरानी कैकेयी श्रीरामचन्द्रजीका रुख पाकर हॢषत हो गयी और कपटपूर्ण स्नेह दिखाकर बोली—तुम्हारी शपथ और भरतकी सौगन्ध है, मुझे राजाके दु:खका दूसरा कुछ भी कारण विदित नहीं है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 379 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 रहसी रानि राम रुख पाई। बोली कपट सनेहु जनाई।।
English explanation
Queen Kaikeyi rejoiced on learning Rama’s disposition and spoke, displaying feigned affection.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रहसी | प्रसन्न हुई | rejoiced |
| रानि | रानी कैकेयी | Queen Kaikeyi |
| राम | राम का | Rama’s |
| रुख | रुख; मनोभाव | disposition; attitude |
| पाई | जानकर | having understood |
| बोली | बोली | spoke |
| कपट | कपटपूर्ण | feigned; deceitful |
| सनेहु | स्नेह | affection |
| जनाई | दिखाकर | having displayed |
2 सपथ तुम्हार भरत कै आना। हेतु न दूसर मै कछु जाना।।
English explanation
I swear by you and by Bharata: I know of no other cause.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सपथ | शपथ | oath |
| तुम्हार | तुम्हारी | by you; your |
| भरत | भरत | Bharata, Rama’s brother |
| कै | की | of; by |
| आना | सौगंध | solemn oath |
| हेतु | कारण | cause |
| न | नहीं | not |
| दूसर | दूसरा | other |
| मै | मैं | I |
| कछु | कोई; कुछ | any |
| जाना | जानती हूँ | know |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.43
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 379
- सहायक विषय
- श्रीराम-कैकेयी-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 379, 380
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