अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तात तुम्हहि मैं जानउँ नीकें। करौं काह असमंजस जीकें।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे तात! मैं तुम्हें अच्छी तरह जानता हूँ! क्या करूँ? जीमें बड़ा असमञ्जस (दुविधा) है। राजाने मुझे त्यागकर सत्यको रखा और प्रेम-प्रणके लिये शरीर छोड़ दिया॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 564 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
तात तुम्हहि मैं जानउँ नीकें। करौं काह असमंजस जीकें।।
राखेउ रायँ सत्य मोहि त्यागी। तनु परिहरेउ पेम पन लागी।।
स्रोत अभिलेख 2.264 · पुस्तक पृ. 563, 564
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 तात तुम्हहि मैं जानउँ नीकें। करौं काह असमंजस जीकें।।
English explanation
Dear brother, I know you well. Why should I harbor uncertainty in my heart?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तात | प्रिय भाई | dear brother |
| तुम्हहि | तुम्हें | you |
| मैं | मैं | I |
| जानउँ | जानता हूँ | know |
| नीकें | अच्छी तरह | well |
| करौं | मैं करूँ | should I create |
| काह | क्यों | why |
| असमंजस | दुविधा | uncertainty |
| जीकें | मन में | in my heart |
2 राखेउ रायँ सत्य मोहि त्यागी। तनु परिहरेउ पेम पन लागी।।
English explanation
King Dasharatha upheld his word by giving me up, and gave up his body to uphold his pledge of love.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राखेउ | निभाया | upheld |
| रायँ | राजा दशरथ ने | King Dasharatha |
| सत्य | वचन की सत्यता | the truth of his word |
| मोहि | मुझे | me |
| त्यागी | त्यागकर | by giving up |
| तनु | शरीर | his body |
| परिहरेउ | छोड़ दिया | gave up |
| पेम | प्रेम का | of love |
| पन | प्रण | pledge |
| लागी | के लिए | for the sake of |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.264
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 564
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरतादिका संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 563, 564
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।