अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तासु बचन मेटत मन सोचू। तेहि तें अधिक तुम्हार सँकोचू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दउनके वचनको मेटते मनमें सोच होता है। उससे भी बढ़कर तुम्हारा संकोच है। उसपर भी गुरुजीने मुझे आज्ञा दी है। इसलिये अब तुम जो कुछ कहो, अवश्य ही मैं वही करना चाहता हूँ॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 564 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
तासु बचन मेटत मन सोचू। तेहि तें अधिक तुम्हार सँकोचू।।
ता पर गुर मोहि आयसु दीन्हा। अवसि जो कहहु चहउँ सोइ कीन्हा।।
स्रोत अभिलेख 2.264 · पुस्तक पृ. 563, 564
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 तासु बचन मेटत मन सोचू। तेहि तें अधिक तुम्हार सँकोचू।।
English explanation
My heart is troubled at the thought of undoing his word; still greater is my reluctance to disappoint you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तासु | उनका, राजा दशरथ का | his, Dasharatha’s |
| बचन | वचन | word |
| मेटत | मिटाने पर | in undoing |
| मन | मन में | in my heart |
| सोचू | चिंता | distress |
| तेहि | उस चिंता | that distress |
| तें | से | than |
| अधिक | अधिक | greater |
| तुम्हार | तुम्हारे प्रति | toward you |
| सँकोचू | संकोच | reluctance to disappoint |
2 ता पर गुर मोहि आयसु दीन्हा। अवसि जो कहहु चहउँ सोइ कीन्हा।।
English explanation
Moreover, the guru has given me his command. Whatever you say, I certainly wish to do that very thing.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ता | उस | that |
| पर | के ऊपर, अतिरिक्त | in addition to |
| गुर | गुरु वसिष्ठ ने | the guru Vasistha |
| मोहि | मुझे | to me |
| आयसु | आज्ञा | command |
| दीन्हा | दी है | has given |
| अवसि | अवश्य | certainly |
| जो | जो कुछ | whatever |
| कहहु | तुम कहो | you say |
| चहउँ | मैं चाहता हूँ | I wish |
| सोइ | वही | that very thing |
| कीन्हा | करना | to do |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.264
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 564
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरतादिका संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 563, 564
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।