अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तात जाँय जियँ करहु गलानी। ईस अधीन जीव गति जानी।।
मूल पाठ
तात जाँय जियँ करहु गलानी। ईस अधीन जीव गति जानी।।
तीनि काल तिभुअन मत मोरें। पुन्यसिलोक तात तर तोरे।।
स्रोत अभिलेख 2.263 · पुस्तक पृ. 563, 563
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे तात! तुम अपने हृदयमें व्यर्थ ही ग्लानि करते हो। जीवकी गतिको ईश्वरके अधीन जानो। मेरे मतमें [भूत, भविष्य, वर्तमान] तीनों कालों और [स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल] तीनों लोकोंके सब पुण्यात्मा पुरुष तुमसे नीचे हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 563 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तात जाँय जियँ करहु गलानी। ईस अधीन जीव गति जानी।।
English explanation
Dear brother, you burden your heart with remorse in vain; know that a living being’s course is subject to God.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तात | प्रिय भाई | dear brother |
| जाँय | व्यर्थ | in vain |
| जियँ | हृदय में | in your heart |
| करहु | करते हो | you cause |
| गलानी | ग्लानि; आत्मखेद | remorse; self-reproach |
| ईस | ईश्वर के | to God |
| अधीन | अधीन | subject |
| जीव | जीव की | a living being’s |
| गति | गति; जीवन की दशा | course; condition |
| जानी | जान लो | know |
2 तीनि काल तिभुअन मत मोरें। पुन्यसिलोक तात तर तोरे।।
English explanation
Dear brother, in my judgment, across all three times and all three worlds, none has a holier renown than you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तीनि | तीनों | all three |
| काल | काल—भूत, वर्तमान और भविष्य | times—past, present, and future |
| तिभुअन | तीनों लोकों में | in the three worlds |
| मत | मत; विचार | judgment |
| मोरें | मेरे | my |
| पुन्यसिलोक | पवित्र यशवाला | one of holy renown |
| तात | प्रिय भाई | dear brother |
| तर | बढ़कर; अधिक | greater; surpassing |
| तोरे | तुमसे | than you |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.263
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 563
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरतादिका संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 563, 563
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।