अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहि अनेक बिधि कथा पुरानी। भरत प्रबोधु कीन्ह मुनि ग्यानी।।
मूल पाठ
कहि अनेक बिधि कथा पुरानी। भरत प्रबोधु कीन्ह मुनि ग्यानी।।
बोले उचित बचन रघुनंदू। दिनकर कुल कैरव बन चंदू।।
स्रोत अभिलेख 2.263 · पुस्तक पृ. 563, 563
भावार्थ
मूल पाठ के बादतब ज्ञानी मुनि वसिष्ठजीने अनेक प्रकारकी पुरानी (ऐतिहासिक) कथाएँ कहकर भरतजीका समाधान किया। फिर सूर्यकुलरूपी कुमुदवनके प्रफुल्लित करनेवाले चन्द्रमा श्रीरघुनन्दन उचित वचन बोले—॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 563 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कहि अनेक बिधि कथा पुरानी। भरत प्रबोधु कीन्ह मुनि ग्यानी।।
English explanation
The wise sage consoled and instructed Bharata by recounting various ancient stories.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहि | कहकर; सुनाकर | having recounted |
| अनेक | अनेक | many |
| बिधि | प्रकार | kinds |
| कथा | कथाएँ | stories |
| पुरानी | पुरानी; प्राचीन | ancient |
| भरत | भरत को | Bharata |
| प्रबोधु | समझाना; सांत्वना | instruction and consolation |
| कीन्ह | किया | gave |
| मुनि | मुनि; यहाँ वसिष्ठ | the sage, here Vasishtha |
| ग्यानी | ज्ञानी | wise |
2 बोले उचित बचन रघुनंदू। दिनकर कुल कैरव बन चंदू।।
English explanation
Rama, delight of Raghu’s line and like the moon to the solar dynasty’s grove of white water lilies, spoke fitting words.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बोले | कहने लगे | spoke |
| उचित | उचित | fitting |
| बचन | वचन | words |
| रघुनंदू | रघुकुल को आनंद देने वाले राम | Rama, delight of Raghu’s line |
| दिनकर | सूर्य | the sun |
| कुल | वंश | dynasty |
| कैरव | श्वेत कुमुद; रात में खिलने वाले कमल | white, night-blooming water lilies |
| बन | वन; समूह | grove |
| चंदू | चंद्रमा | moon |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.263
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 563
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरतादिका संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 563, 563
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