अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि अति बिकल भरत बर बानी। आरति प्रीति बिनय नय सानी।।
मूल पाठ
सुनि अति बिकल भरत बर बानी। आरति प्रीति बिनय नय सानी।।
सोक मगन सब सभाँ खभारू। मनहुँ कमल बन परेउ तुसारू।।
स्रोत अभिलेख 2.263 · पुस्तक पृ. 563, 563
भावार्थ
मूल पाठ के बादअत्यन्त व्याकुल तथा दु:ख, प्रेम, विनय और नीतिमें सनी हुई भरतजीकी श्रेष्ठ वाणी सुनकर सब लोग शोकमें मग्र हो गये, सारी सभामें विषाद छा गया। मानो कमलके वनपर पाला पड़ गया हो॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 563 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सुनि अति बिकल भरत बर बानी। आरति प्रीति बिनय नय सानी।।
English explanation
On hearing the deeply distressed Bharata’s noble words, imbued with anguish, love, humility, and sound judgment… (AI-generated meaning draft)
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| अति | अत्यंत | extremely |
| बिकल | व्याकुल | distressed |
| भरत | श्रीराम के भाई भरत | Bharata, Rama’s brother |
| बर | श्रेष्ठ | excellent |
| बानी | वाणी | words |
| आरति | आर्तता; दुःखभरी व्याकुलता | anguish |
| प्रीति | प्रेम | love |
| बिनय | विनम्र निवेदन | humble supplication |
| नय | नीति; उचित विवेक | sound judgment |
| सानी | सनी हुई | imbued with |
2 सोक मगन सब सभाँ खभारू। मनहुँ कमल बन परेउ तुसारू।।
English explanation
The whole assembly sank into grief and distress, as though frost had fallen upon a grove of lotuses.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोक | शोक | grief |
| मगन | डूबी हुई | immersed |
| सब | सारी | the whole |
| सभाँ | सभा | assembly |
| खभारू | क्षोभ; व्याकुलता | agitation; distress |
| मनहुँ | मानो | as though |
| कमल | कमलों का | of lotuses |
| बन | वन; समूह | grove |
| परेउ | पड़ गया | had fallen |
| तुसारू | पाला | frost |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.263
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 563
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरतादिका संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 563, 563
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।