अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तात चढ़हु रथ बलि महतारी। होइहि प्रिय परिवारु दुखारी।।
मूल पाठ
तात चढ़हु रथ बलि महतारी। होइहि प्रिय परिवारु दुखारी।।
तुम्हरें चलत चलिहि सबु लोगू। सकल सोक कृस नहिं मग जोगू।।
स्रोत अभिलेख 2.188 · पुस्तक पृ. 499, 499
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे बेटा! माता बलैयाँ लेती है, तुम रथपर चढ़ जाओ, नहीं तो सारा प्यारा परिवार दुखी हो जायगा। तुम्हारे पैदल चलनेसे सभी लोग पैदल चलेंगे। शोकके मारे सब दुबले हो रहे हैं, पैदल रास्तेके (पैदल चलनेके) योग्य नहीं हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 499 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 तात चढ़हु रथ बलि महतारी। होइहि प्रिय परिवारु दुखारी।।
English explanation
Dear son, mount the chariot; your mother would give herself for you. Your dear family will suffer.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तात | बेटा | dear son |
| चढ़हु | चढ़ो | mount |
| रथ | रथ पर | the chariot |
| बलि | बलिहारी जाती हूँ | would give myself for you |
| महतारी | तुम्हारी माँ | your mother |
| होइहि | हो जाएगा | will become |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| परिवारु | परिवार | family |
| दुखारी | दुखी; कष्टग्रस्त | distressed; suffering |
2 तुम्हरें चलत चलिहि सबु लोगू। सकल सोक कृस नहिं मग जोगू।।
English explanation
If you walk, everyone else will walk too. All are weakened by grief and unfit to travel the road on foot.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्हरें | तुम्हारे | your |
| चलत | पैदल चलने पर | walking on foot |
| चलिहि | चलेंगे | will walk |
| सबु | सभी | all |
| लोगू | लोग | the people |
| सकल | सब | all |
| सोक | शोक से | by grief |
| कृस | दुर्बल | weakened |
| नहिं | नहीं | not |
| मग | मार्ग की यात्रा के | for travelling the road |
| जोगू | योग्य | fit |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.188
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 499
- सहायक विषय
- निषादकी शङ्का और सावधानी
- मुद्रित पृष्ठ
- 499, 499
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।