अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
देखि सनेहु लोग अनुरागे। उतरि चले हय गय रथ त्यागे।।
मूल पाठ
देखि सनेहु लोग अनुरागे। उतरि चले हय गय रथ त्यागे।।
जाइ समीप राखि निज डोली। राम मातु मृदु बानी बोली।।
स्रोत अभिलेख 2.188 · पुस्तक पृ. 499, 499
भावार्थ
मूल पाठ के बादउनका स्नेह देखकर लोग प्रेममें मग्र हो गये और सब घोड़े, हाथी, रथोंको छोड़कर उनसे उतरकर पैदल चलने लगे। तब श्रीरामचन्द्रजीकी माता कौसल्याजी भरतजीके पास जाकर और अपनी पालकी उनके समीप खड़ी करके कोमल वाणीसे बोलीं—॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 499 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 देखि सनेहु लोग अनुरागे। उतरि चले हय गय रथ त्यागे।।
English explanation
Seeing Bharata’s love, the people were moved with affection; they dismounted and proceeded on foot, leaving their horses, elephants, and chariots.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | seeing |
| सनेहु | भरत का प्रेम | Bharata’s love |
| लोग | लोग | the people |
| अनुरागे | प्रेम से भर गए | were filled with affection |
| उतरि | उतरकर | having dismounted |
| चले | चल पड़े | set out |
| हय | घोड़े | horses |
| गय | हाथी | elephants |
| रथ | रथ | chariots |
| त्यागे | छोड़कर | leaving behind |
2 जाइ समीप राखि निज डोली। राम मातु मृदु बानी बोली।।
English explanation
Rama’s mother Kaushalya came near, had her palanquin set down, and spoke gently.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जाइ | जाकर | having gone |
| समीप | पास | nearby |
| राखि | रखकर; रखवाकर | having set down |
| निज | अपनी | her own |
| डोली | पालकी | palanquin |
| राम | राम की | Rama’s |
| मातु | माता कौसल्या | mother Kaushalya |
| मृदु | कोमल | gentle |
| बानी | वाणी | words |
| बोली | बोलीं | spoke |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.188
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 499
- सहायक विषय
- निषादकी शङ्का और सावधानी
- मुद्रित पृष्ठ
- 499, 499
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।