अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम दरस बस सब नर नारी। जनु करि करिनि चले तकि बारी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रीरामचन्द्रजीके दर्शनके वशमें हुए (दर्शनकी अनन्य लालसासे) सब नर-नारी ऐसे चले मानो प्यासे हाथी-हथिनी जलको तककर [बड़ी तेजीसे बावले-से हुए] जा रहे हों। श्रीसीतारामजी [सब सुखोंको छोड़कर] वनमें हैं, मनमें ऐसा विचार करके छोटे भाई शत्रुघ्नजीसहित भरतजी पैदल ही चले जा रहे हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 499 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
राम दरस बस सब नर नारी। जनु करि करिनि चले तकि बारी।।
बन सिय रामु समुझि मन माहीं। सानुज भरत पयादेहिं जाहीं।।
स्रोत अभिलेख 2.188 · पुस्तक पृ. 499, 499
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 राम दरस बस सब नर नारी। जनु करि करिनि चले तकि बारी।।
English explanation
Drawn by the desire to see Rama, all the men and women went as though elephants and female elephants were heading toward water.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम के | of Rama |
| दरस | दर्शन | the sight of him |
| बस | की चाह के वश में | drawn by the desire for |
| सब | सभी | all |
| नर | पुरुष | men |
| नारी | स्त्रियाँ | women |
| जनु | मानो | as though |
| करि | हाथी | male elephants |
| करिनि | हथिनियाँ | female elephants |
| चले | चल पड़े | set out |
| तकि | देखकर; लक्ष्य करके | looking toward; making for |
| बारी | पानी | water |
2 बन सिय रामु समुझि मन माहीं। सानुज भरत पयादेहिं जाहीं।।
English explanation
Keeping in mind that Sita and Rama are in the forest, Bharata travels on foot with his younger brother.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बन | वन में | in the forest |
| सिय | सीता | Sita, Rama’s wife |
| रामु | राम | Rama |
| समुझि | विचार करके; जानकर | remembering; considering |
| मन | मन | the mind |
| माहीं | में | within |
| सानुज | छोटे भाई शत्रुघ्न सहित | with his younger brother Shatrughna |
| भरत | भरत | Bharata, Rama’s brother |
| पयादेहिं | पैदल | on foot |
| जाहीं | जा रहे हैं | are travelling |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.188
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 499
- सहायक विषय
- निषादकी शङ्का और सावधानी
- मुद्रित पृष्ठ
- 499, 499
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।